न्यूज़11 भारत
रांची/डेस्क: लोकपर्व करमा पूजा हर वर्ष भाद्रपद मतलब भादो महीने के शुक्ल में पड़ने वाली एकादशी तिथि को मनाया जाता हैं. इस दिन विशेषरूप से बहने अपने भाइयों की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं और करम डाली की पूजा करती हैं.
आदिवासी मूल के लोग प्रकृति को ही अपना देवता मानते हैं. इसलिए करमा पूजा पर करम की डाली को ईश्वर मतलब प्रकृति का प्रतिक मानकर पूजा की जाती हैं. करम या करमा पर्व मुख्य रूप से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ झारखंड, उड़ीसा और बिहार जैसे राज्यों में आदिवासियों द्वारा मनाया जाने वाला त्योहार हैं. आदिवासी समाज के लोग इसे बड़ी उत्साह के साथ मानते हैं. इस दिन करमा धरमा कथा का भी विशेष महत्व होता हैं. करम पूजा की डाल की लोग पूजा करते हैं. रात के वक्त बहने गीत गाकर नृत्य करती हैं. तरह-तरह के पकवान बनाए जाते है और परिवार के सुख-समृद्धि की कामना की जाती हैं.
क्या करते है करमा पूजा
करमा पूजा पर महिलाएं व्रत रखती है और करम डाल की पूजा करती हैं. करम आदिवासी मूल के लोगों का आराध्य वृक्ष माना जाता हैं. लोग अपने घर-आंगन की साफ-सफाई कर सजाते हैं. आदिवासियों के धार्मिक स्थल अखरा में करम डाली को पूरे विधि-विधान के साथ लगाया जाता हैं. पूजा के पूर्व लोग करम डाली का आह्वाहन भी करते हैं. इस दिन करम वृक्ष पूजा कर बहने कामना करती है कि, उनके भाई की आयु भी करम वृक्ष की तरह ही अधिक हो.
यह भी पढ़े: सिंधु जल संधि रद्द होने के बाद भी भारत का बड़ा दिल, पाकिस्तान को भेजा बाढ़ अलर्ट