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रांची/डेस्क: जब हादसे हो जाते हैं तब उसकी परतें उधड़नी शुरू होती हैं. ऐसा ही कुछ दिल्ली के मालवीय नगर में होटल के साथ हुआ है. पहले तो यह बता दें कि मालवीय नगर के जिस होटल में भीषण आग लगी थी, उसमें 21 लोगों की मौत हो गई थी जिसमें 18 विदेशी नागरिक भी शामिल थे. 37 लोगों को बचाया गया, जिनमें से कई की हालत गंभीर है. लोगों को बचाने के क्रम में 10 पुलिसकर्मी भी घायल हो गये.
अब जबकि यह हादसा हो गया है और कई इनसानी जानों की बलि ले चुका है, बड़े ही नहीं, छोटे शहरों में बहुमंजिला इमारतों की सुरक्षा को लेकर सवाल तो खड़े हो ही रहे हैं, लेकिन इन बहुमंजिला इमारतों के खड़े होने में जो लापरवाहियां बरती जाती हैं, वह सामने आ रही हैं.
जब 6 कमरों का लाइसेंस था तो 25 कमरे बन जाने के लिए जिम्मेदार कौन-कौन?
मालवीयनगर के फ्लोरिस स्टे गेस्टहाउस के बारे में प्रारम्भिक जानकारी सामने आई है. इस होलट को B&B यानी बेड एंड ब्रेकफास्ट कॉन्सेप्ट के तहत लाइसेंस जारी किया गया था. दिल्ली प्रशासन की ओर से इस होटल को केवल 6 कमरों का ही लाइसेंस प्राप्त था, अब होटल मैनेजमेंट ही नहीं, दिल्ली प्रशासन ही यह बताए कि जब सिर्फ 6 कमरों का लाइसेंस मिला था तो वहां 25 कमरों में मेहमान कैसे ठहरे हुए थे. क्या इस होटल की दिल्ली प्रशासन द्वारा कभी कोई जानकारी ली ही नहीं जाती थी? अगर जानकारी ली जाती थी तो उसे कैसे नहीं पता चला कि उस होटल में क्षमता से ज्यादा गेस्ट ठहरते हैं. जैसा कि पहले ही बताया गया है कि हादसे में 21 लोगों की मौत हुई और 37 लोगों को बचाया गया. तो इतने लोग सिर्फ 6 कमरों में कैसे ठहरे हुए थे?
होटल को लेकर कई और खामियां भी उजागर हुई हैं. उजागर क्या हुई हैं, ये खामियां तो पहले से ही वहां मौजूद हैं. वहां आने-जाने का एक ही रास्ता है और वह भी काफी संकरा. यानी यह होटल बेहद संकरी गली में बना है. इस वजह से फायर ब्रिगेड को भी मदद पहुंचाने में काफी दिक्कतें हुईं. एक बात और भी सामने आई कि होटल के पास फायर NOC भी नहीं थी. जो कि होटल संचालन से जुड़े नियमों का घोर उल्लंघन है
इस होटल के बारे में सबसे रोचक जानकारी यह सामने आई, जैसा कि होटल के मालिक ने स्वीकार भी किया कि होटल बन जाने के बाद उसे NOC नहीं मिली थी, फिर भी होटल चल रहा था. NOC इसलिए नहीं मिली थी, क्योंकि यहां सही वेंटिलेशन नहीं है, आने-जाने के अलग-अलग रास्ते नहीं हैं. फायर सेफ्टी के उपाय नदारद हैं.
जैसी लापरवाही दिल्ली के मालवीयनगर के होटल को लेकर देखने को मिली, यह कोई इकलौता उदाहरण नहीं है. खुद राजधानी दिल्ली में ही ऐसे ढेरों उदाहरण मिल जाएंगे. दिल्ली ही नहीं देश का कोई भी छोटा या बड़ा शहर इन लापरवाहियों से अछूता नहीं है. झारखंड यहां तक कि राजधानी रांची में ऐसे उदाहरण ढंढने निकला जाए तो यहां भी मिल जाएंगे. लापरवाहियां हुई तो तो जाहिर है कि कभी न कभी तो दुष्परिणाम भी झेलना पड़ सकता है. सवाल सभी से है- आखिर यह लापरवाही क्यों?
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