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रांची/डेस्क: जब दुनिया धीरे-धीरे कोरोना महामारी को पीछे छोड़ सामान्य जीवन की ओर बढ़ रही थी, तभी एक नया खतरा सामने आ गया हैं. COVID-19 का एक नया वैरिएंट ‘Cicada’ (BA.3.2) वैश्विक स्तर पर तेजी से चर्चा में हैं. यह वैरिएंट अब तक 23 देशों में फैल चुका है और इसकी मौजूदगी चुपचाप बढ़ रही हैं.
क्या है ‘Cicada’ वैरिएंट?
‘Cicada’ दरअसल Omicron का ही एक नया वंशज है, जिसे साइंटिफिक भाषा में BA.3.2 कहा जा रहा हैं. यह नाम एक खास कीड़े ‘सिकाडा’ से प्रेरित है, जो सालों तक छिपा रहता है और अचानक बाहर आकर सबको चौंका देता है ठीक वैसे ही यह वैरिएंट भी लंबे समय तक नजरों से बचकर फैलता रहा. इस नए वैरिएंट की सबसे बड़ी चिंता इसकी संरचना हैं. वैज्ञानिकों ने इसके स्पाइक प्रोटीन में 70 से 75 तक जेनेटिक बदलाव (म्यूटेशन) पाए हैं. यही स्पाइक प्रोटीन वायरस को शरीर की कोशिकाओं में प्रवेश करने में मदद करता है यानी जो वैक्सीन इस प्रोटीन को पहचानकर काम करती है, उनके लिए यह नया रूप थोड़ा “अनजान” साबित हो सकता हैं.
अफ्रीका से अमेरिका तक, तेजी से फैलाव
BA.3.2 की पहचान सबसे पहले नवंबर 2024 में अफ्रीका में हुई थी. इसके बाद 2025 में इसने धीरे-धीरे दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में फैलना शुरू किया. अमेरिका में जून 2025 में पहला केस मिला और अब वहां 29 राज्यों के सीवेज (wastewater) में इसके संकेत मिल चुके हैं. यह बताता है कि वायरस बिना ज्यादा शोर किए तेजी से फैल रहा हैं.
क्या यह ज्यादा खतरनाक है?
फिलहाल राहत की बात यह है कि डॉक्टरों और वैज्ञानिकों को अभी तक ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला है कि ‘Cicada’ पुराने वैरिएंट्स से ज्यादा घातक हैलेकिन चिंता इसकी तेज संक्रमण दर को लेकर है यानी यह ज्यादा लोगों को संक्रमित कर सकता हैं. खास खतरा इन लोगों को फेफड़ों की पुरानी बीमारी (Chronic Lung Disease) वाले मरीज, ‘Long COVID’ से जूझ रहे लोग और कमजोर इम्यून सिस्टम वाले व्यक्ति को हैं. डेटा के अनुसार, आज भी हर 100 में से लगभग 3 लोगों में Long COVID के लक्षण विकसित हो सकते हैं.
भारत में क्या है स्थिति?
भारत में फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही हैं. INSACOG के अनुसार, देश में XFG वैरिएंट के 163 मामले सामने आए है, जो ओमिक्रॉन का ही एक रूप हैं. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के कारण BA.3.2 के भारत पहुंचने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.
क्या पुरानी वैक्सीन असरदार है?
विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा वैक्सीन और बूस्टर अभी भी गंभीर बीमारी और मौत के खतरे को कम करने में प्रभावी है लेकिन चूंकि यह नया वैरिएंट काफी बदला हुआ है, इसलिए यह इम्यून सिस्टम को पहचानने में थोड़ा “देरी” करवा सकता है और इसी दौरान संक्रमण हो सकता हैं. इस वैरिएंट को पकड़ने के लिए वैज्ञानिक ‘वेस्टवॉटर मॉनिटरिंग’ का सहारा ले रहे है यानी शहरों के सीवेज पानी की जांच करके वायरस के फैलाव का अंदाजा लगाया जा रहा हैं. यह तरीका बीमारी के फैलने से पहले ही चेतावनी दे देता है हालांकि वैश्विक स्तर पर इस डेटा शेयरिंग में कमी चिंता का विषय हैं.
बचाव ही सबसे बड़ा हथियार
डॉक्टर्स के मुताबिक, घबराने की नहीं बल्कि सतर्क रहने की जरूरत हैं.
- नियमित हाथ धोना
- भीड़भाड़ से बचना
- लक्षण होने पर घर पर रहना
- गंभीर मरीजों का डॉक्टर से संपर्क में रहना
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