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रांची/डेस्क: लगता है राजनीति में किसी को भी कुछ भी कहने का 'लाइसेंस' मिल जाता है. अगर ऐसा नहीं होता तो तेजस्वी यादव बिहार के बजट सेशन में महिलाओं के लिए अमर्यादित शब्दों का प्रयोग नहीं करते. हो सकता है महिलाओं के लिए उन्होंने जिन शब्दों का प्रयोग किया, उसके उनकी नजर में 'सामान्य से' मायने हों, लेकिन उनके शब्द महिलाओं के लिए बिल्कुल ही अमर्यादित हैं.
भले ही तेजस्वी यादव ने बिहार विधानसभा में अपनी हार की खीझ उतारी हो, लेकिन सदन में उन्होंने को कुछ भी कहा उससे खुद उनकी पार्टी और इंडी गठबंधन के नेता और महिलाएं असहज हो गये. बजट भाषण पढ़ते समय तेजस्वी यादव ने महिलाओं के लिए जब यह विवादित बयान दिया, सदन में हंगामा मच गया. एनडीए की महिला विधायकों ने तेजस्वी यादव के बयान पर बिफर उठीं. तेजस्वी यादव ने सरकार पर लापरवाही, रोजगार संकट और बढ़ते अपराध के आरोप सरकार पर लगाये, यहां तक तो ठीक था, लेकिन जब उन्होंने कहा कि एनडीए ने चुनाव जीतने के लिए महिलाओं को 'खरीदने' का आरोप लगाया तो इस पर विधानसभा में हंगामा मच गया.
क्या किसी भी जननप्रतिनिधि को यह शोभा देता है कि ने महिलाओं के लिए ऐसे विवादित बयान दे? उन्होंने बिहार की नीतीश सरकार पर आरोप लगाते हुए कह डाला कि बिहार की महिलाएं बिकती हैं. हालांकि तेजस्वी यादव यह कहना चाह रहे थे कि बिहार विधानसभा चुनाव में महिलाओं को जो पैसे दिये, उसके कारण ही एनडीए को इतनी बड़ी जीत मिली. भले ही उनके कहने का तात्पर्य और उनके शब्दों में तालमेल न हो, लेकिन उन्हें इतना तो जरूर ध्यान रखना चाहिए कि उनके शब्दों को मतलब क्या है। अगर ऐसा नहीं होता तो सदन में इंडी गठबंधन की महिलाएं भले चुप बैठी रह गयीं, लेकिन एनडीए की महिला विधायकों ने इसका कड़ा विरोध जताया.
बिहार में करारी हार के बाद एक के बाद एक आधारहीन प्रतिक्रिया देने वाले तेजस्वी यादव क्या इस बार के अपने बयान पर शर्मिंदगी व्यक्त करते हैं और क्षमा याचना करते हैं या फिर उनका यह बयान उनके पिछले दिये हुए बयानों की तरह ही आया-गया ही होकर रह जायेगा.
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