सहरसा नगर निगम विवाद गहराया: विभाग के आईटी सेल के कार्रवाई पर महापौर के सवाल, ठे...

सहरसा नगर निगम विवाद गहराया: विभाग के आईटी सेल के कार्रवाई पर महापौर के सवाल, ठेका व भुगतान प्रक्रिया जांच के घेरे में

सहरसा नगर निगम विवाद गहराया विभाग के आईटी सेल के कार्रवाई पर महापौर के सवाल ठेका व भुगतान प्रक्रिया जांच के घेरे में

इन्द्रदेव/न्यूज11 भारत

सहरसा/डेस्क: सहरसा नगर निगम में लाइट खरीद योजना व मेंटेनेंस से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितता के मामले ने तूल पकड़ लिया है. इस प्रकरण को लेकर पूरे बिहार में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है. एक ओर विभागीय स्तर पर कार्रवाई की चर्चा है, वहीं दूसरी ओर महापौर बेन प्रिया ने प्रेस वार्ता कर आरोपों को निराधार बताते हुए पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं.

महापौर ने कहा कि जिस जांच समिति को 3 जुलाई 2025 को निरस्त कर दिया गया था, उसी समिति की रिपोर्ट के आधार पर विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा कैसे की गई. उन्होंने इस संबंध में जिला पदाधिकारी से स्पष्टीकरण मांगने की बात कही है.

जानकारी के अनुसार, पूर्व में गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी थी, जिसके आधार पर नगर विकास विभाग बिहार ने 11 फरवरी 2025 को अपने विभागीय पोर्टल पर प्रेस नोट जारी कर प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था. विभाग ने तीन दिनों के भीतर मामला दर्ज कर रिपोर्ट समर्पित करने को कहा था, जिसके बाद यह मामला सार्वजनिक चर्चा में आ गया.

इसी क्रम में नगर निगम आयुक्त प्रभात झा द्वारा तीन एजेंसियों के विरुद्ध थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई. आरोप है कि नगर निगम ने लाइट व अन्य मेंटेनेंस कार्यों के लिए तीन वर्षों का ठेका दिया था, जिसके तहत प्रति माह लगभग 50 लाख रुपये का भुगतान किया जाना था. इस भुगतान और ठेका प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं.

महापौर ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि विभागीय स्तर पर जारी प्रेस विज्ञप्ति भ्रामक थी और मंत्री से शिकायत के बाद उसे पोर्टल से हटा लिया गया. उन्होंने यह भी कहा कि वे कानूनी सलाह ले रही हैं और मानहानि का मुकदमा दायर करेंगी.

यह मामला न्यायालय तक भी पहुंच चुका है. पटना हाईकोर्ट ने 9 फरवरी 2025 को सुनवाई के दौरान संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया था तथा अगली सुनवाई 24 मार्च 2025 निर्धारित की गई थी.

महापौर का कहना है कि नगर निगम की पारदर्शी कार्यप्रणाली को कमजोर करने की साजिश रची जा रही है, जबकि शहर में मार्केट कॉम्प्लेक्स निर्माण सहित अन्य शहरी विकास योजनाएं नियमित रूप से जारी हैं. उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति जारी रखने की बात दोहराई.

इस पूरे प्रकरण ने नगर निगम की कार्यप्रणाली, जांच प्रक्रिया की वैधता, ठेका प्रणाली और वित्तीय अनुमोदनों पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. अब प्रशासनिक और न्यायिक स्तर पर होने वाली अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई है.

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