न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क: बिहार में जून महीने की शुरुआत के साथ ही व्यावसायिक गैस उपभोक्ताओं को महंगाई का नया झटका लगा है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 53.50 रुपये की वृद्धि कर दी है। नई दरें लागू होने के बाद राजधानी पटना में एक कमर्शियल सिलेंडर की कीमत बढ़कर 3,414.50 रुपये पहुंच गई है। इस बढ़ोतरी का सबसे अधिक असर होटल, रेस्तरां, ढाबा, बेकरी, मिठाई दुकान और कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों पर पड़ने वाला है। व्यापारियों का कहना है कि पहले से ही खाद्य सामग्री, बिजली और श्रम लागत में बढ़ोतरी हो रही थी, ऐसे में गैस की कीमत बढ़ने से उनका खर्च और बढ़ जाएगा। कई छोटे व्यवसायी इसे अपने लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ मान रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार की हलचल का स्थानीय कारोबार पर असर
विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ती लागत का प्रभाव एलपीजी की कीमतों पर पड़ रहा है, जिसके चलते कमर्शियल सिलेंडर महंगे हुए हैं। इसका सीधा असर उन व्यवसायों पर पड़ेगा जिनका संचालन बड़े पैमाने पर गैस पर निर्भर है। होटल और रेस्तरां संचालकों का कहना है कि लगातार बढ़ती लागत के कारण उनके लिए मौजूदा दरों पर सेवाएं देना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। यदि आने वाले समय में कीमतों में और बढ़ोतरी होती है, तो उन्हें अपने उत्पादों और सेवाओं की कीमतों में संशोधन करने पर मजबूर होना पड़ सकता है। इससे आम ग्राहकों की जेब पर भी असर पड़ने की संभावना है।
शादी-विवाह सीजन में बढ़ी मुश्किलें, घरेलू उपभोक्ताओं को राहत
कमर्शियल गैस की कीमतों में बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब शादी-विवाह और सामाजिक आयोजनों का सीजन चल रहा है। कैटरिंग, मिठाई और भोज व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि गैस महंगी होने से उनकी कुल लागत में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिसका असर उनके मुनाफे पर पड़ सकता है। हालांकि आम घरेलू उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर यह है कि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। घरेलू गैस उपभोक्ताओं को पुराने दाम पर ही सिलेंडर मिलता रहेगा। वहीं जानकारों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहा, तो आने वाले महीनों में व्यावसायिक उपभोक्ताओं के सामने और अधिक चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। इससे महंगाई का दायरा भी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।