न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क: बिहार के बहुचर्चित टेंडर घोटाले में स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) ने एक बड़ा एक्शन लेते हुए तीन हाई-प्रोफाइल आरोपितों को गिरफ्तार किया है. पकड़े गए लोगों में भवन निर्माण विभाग के भूतपूर्व मुख्य अभियंता (चीफ इंजीनियर) तारिणी दास, वित्त विभाग के पूर्व संयुक्त सचिव मुमुक्षु चौधरी और बुडको (नगर विकास विभाग) के कार्यपालक अभियंता (एग्जीक्यूटिव इंजीनियर) उमेश कुमार सिंह शामिल हैं. बुधवार को एसवीयू के एडीजी पंकज कुमार दराद ने आधिकारिक तौर पर इन गिरफ्तारियों की पुष्टि की.
भ्रष्टाचारियों के पास से मिली थी 11.53 करोड़ की काली कमाई
जांच एजेंसी के अनुसार, इन तीनों अधिकारियों के पास से भ्रष्टाचार के जरिए जुटाए गए कुल 11.53 करोड़ रुपये बरामद हुए थे. इस काली कमाई के सामने आने के बाद ही इन पर शिकंजा कसा गया था. एडीजी ने साफ किया है कि टेंडर घोटाले की जांच अभी लगातार जारी है और इस खेल में शामिल अन्य जो भी लोग होंगे, सबूत मिलते ही उन पर भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
IAS संजीव हंस पर गिरफ्तारी का खतरा, आवास और दफ्तर से मिले गायब
इस मामले के तार भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी संजीव हंस से भी जुड़ रहे हैं. एसवीयू के सूत्रों के मुताबिक उन पर भी गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है. निगरानी की एक टीम उनकी धरपकड़ के लिए पटना के ऊर्जा स्टेडियम के पास स्थित उनके सरकारी आवास पर पहुंची थी, जबकि दूसरी टीम ने पुराने सचिवालय स्थित राजस्व पर्षद कार्यालय में दबिश दी. हालांकि, संजीव हंस दोनों ही जगहों पर नहीं मिले. वे मंगलवार को कार्यालय आए थे, लेकिन आशंका जताई जा रही है कि गिरफ्तारी के डर से फिलहाल वे फरार हो गए हैं.
रिशुश्री से जुड़े इस मामले में अब तक 5 लोग जा चुके हैं जेल
रिशुश्री से जुड़े इस टेंडर घोटाले में विशेष निगरानी इकाई अब तक कुल 5 लोगों को सलाखों के पीछे भेज चुकी है. इस मामले में सबसे पहली गिरफ्तारी मुख्य आरोपी रिशुश्री की हुई थी, जिसके बाद उसके सहयोगी संतोष को दबोचा गया था. अब इन तीन बड़े अधिकारियों की गिरफ्तारी के बाद पकड़े गए लोगों की संख्या पांच हो गई है.
ED की छापेमारी में खुला था करोड़ों के कैश का राज
इस पूरे सिंडिकेट पर सबसे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हाथ डाला था. ईडी ने जब टेंडर मैनेज करने के इस खेल की कड़ियां जोड़ीं, तो कई बड़े अफसरों और इंजीनियरों के नाम उजागर हुए. इसी जांच के आधार पर साल 2025 में भवन निर्माण विभाग के तत्कालीन चीफ इंजीनियर तारिणी दास के ठिकानों से 8.53 करोड़ रुपये नगद बरामद किए गए थे. वहीं, वित्त विभाग के संयुक्त सचिव मुमुक्षु चौधरी के पास से 2 करोड़ रुपये कैश मिले थे. इन दोनों के खिलाफ एसवीयू ने आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया था, जिसकी जांच अभी चल रही है. इसके अलावा, बुडको के कार्यपालक अभियंता उमेश कुमार सिंह के ठिकानों से भी 1 करोड़ रुपये की नकदी बरामद हुई थी.
प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत दर्ज है मुकदमा
सरकारी सेवा में रहते हुए भ्रष्टाचार करने के आरोप में पूर्व चीफ इंजीनियर तारिणी दास और पूर्व संयुक्त सचिव मुमुक्षु चौधरी पर प्रिवेंशन ऑफ करप्शन (PC) एक्ट के तहत अलग से एफआईआर दर्ज है. पटना स्थित एसवीयू थाने में मुमुक्षु चौधरी पर कांड संख्या 24/25 और तारिणी दास पर कांड संख्या 25/25 दर्ज है. गौरतलब है कि तारिणी दास 31 अक्टूबर 2024 को रिटायर हुए थे और सेवामुक्त होने के महज 9 दिन बाद ही 9 नवंबर को उन्हें दो साल का सेवा विस्तार (एक्सटेंशन) मिल गया था. हालांकि, ईडी की कार्रवाई के बाद सरकार ने उनका यह अनुबंध रद्द कर दिया था.
जानिए कौन है रिशुश्री और कैसे फैला था इसका सिंडिकेट
एसवीयू ने बीते 27 मई को पटना के मीठापुर स्थित कांताराम सखी एंक्लेव में रिशुश्री के ठिकाने पर धावा बोला था, जहां से भारी मात्रा में आभूषण और नकदी बरामद हुई थी. इसके बाद 28 मई को उसे गिरफ्तार कर विशेष निगरानी अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में बेउर जेल भेज दिया गया.
रिशुश्री के खिलाफ जांच एजेंसियों की कार्रवाई का पूरा घटनाक्रम इस प्रकार है:
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13 जून 2025 (ED की कार्रवाई): ईडी ने देश भर में रिशुश्री के 9 ठिकानों (पटना, मुजफ्फरपुर, पानीपत और सूरत) पर एक साथ छापेमारी की थी. इस दौरान पटना के गोला रोड स्थित सामान्य प्रशासन विभाग के अंडर सेक्रेटरी विनोद कुमार सिंह के घर पर भी दिनभर तलाशी चली. आरोप है कि विनोद कुमार सिंह, रिशुश्री के इशारे पर छोटे कर्मियों के तबादले और तैनाती का खेल देखते थे. ईडी को शक है कि रिशुश्री का ट्रांसफर-पोस्टिंग सिंडिकेट में गहरा दखल था.
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26 नवंबर 2025 (मनी लॉन्ड्रिंग जांच): ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के इसी मामले में अहमदाबाद, सूरत, गुरुग्राम और नई दिल्ली स्थित 9 ठिकानों पर दोबारा छापेमारी की. इस कार्रवाई में ₹33 लाख नकद, डिजिटल उपकरण और कई आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए थे.
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27 मई 2026 (SVU का एक्शन): विशेष निगरानी इकाई ने रिशुश्री के मीठापुर स्थित ठिकाने पर छापेमारी कर नकदी और जेवरात बरामद किए, जिसके अगले दिन उसकी गिरफ्तारी हुई.