बिहार में तपती उमस के बीच बिहार मानसून को लेकर बड़ा अपडेट, जानिए कब मिलेगी लू से...

बिहार में तपती उमस के बीच बिहार मानसून को लेकर बड़ा अपडेट, जानिए कब मिलेगी लू से मुक्ति और कहां होगी पहली बारिश

बिहार मॉनसून पर बड़ा अपडेट: 18 जून से सीमांचल के रास्ते होगी बारिश की एंट्री. जानिए पटना और सीवान समेत आपके जिले में कब बरसेंगे बादल और कब मिलेगी चिलचिलाती उमस से राहत.

बिहार में तपती उमस के बीच बिहार मानसून को लेकर बड़ा अपडेट जानिए कब मिलेगी लू से मुक्ति और कहां होगी पहली बारिश

न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क: बिहार की धरती इस समय भट्टी की तरह तप रही है। चिलचिलाती धूप और पसीने से तरबतर कर देने वाली उमस ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है। लेकिन इस भीषण माहौल के बीच आसमान से एक सुकून देने वाली खबर आ रही है। राहत की बौछारें लेकर आ रहे मॉनसूनी बादल अब बिहार के मुहाने पर खड़े हैं। हालांकि, इस बार पुरवा हवाओं की रफ्तार थोड़ी सुस्त होने के कारण बादलों के इस काफिले को बिहार पहुंचने में अपनी नियमित तारीख (15 जून) से तीन-चार दिन की देरी हो रही है। मौसम विशेषज्ञों का दावा है कि जून का तीसरा सप्ताह शुरू होते ही सूबे की आबो-हवा पूरी तरह बदल जाएगी।

सीमांचल के द्वार से दाखिल होंगी राहत की बूंदें

भौगोलिक संरचना के अनुसार, बिहार में मॉनसून का प्रवेश हमेशा पूर्वी छोर से होता है। बंगाल की खाड़ी की तरफ से आ रही पानी से लदी हवाएं सबसे पहले सीमांचल के इलाके को तरबतर करेंगी। मौसम विभाग के ताजा अनुमान के मुताबिक, 18 से 20 जून के दरमियान किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार और अररिया जिलों में कड़कड़ाती बिजली के साथ पहली मॉनसूनी बारिश होने की उम्मीद है। मुख्य मॉनसून के आने से ठीक पहले इन इलाकों में धूल भरी आंधी और प्री-मॉनसून की फुहारें भी देखने को मिलेंगी।

पटना में 22 तो सीवान-छपरा में 24 जून को पलटेगा मौसम का पासा

मौसम विभाग ने राज्य के बाकी हिस्सों के लिए जो संभावित टाइम-टेबल जारी किया है, वह कुछ इस तरह है:

  • राजधानी पटना, गया और नालंदा के बाशिंदों को लू और उमस से पक्की आजादी मिलने में 22 जून तक का वक्त लग सकता है।

  • सीवान, गोपालगंज और छपरा की तरफ बादलों की असली खेप 24 जून के आसपास पहुंचेगी।

  • अगर हवा का रुख अनुकूल रहा, तो 25 जून की समय-सीमा तक मॉनसून पूरे सूबे को अपने घेरे में ले लेगा, जिसके बाद पारा तेजी से नीचे गिरेगा।

खेती के महासमर के लिए आसमान की तरफ टकटकी

यह मानसूनी सीजन केवल आम जनता को एसी और कूलर के कमरों से बाहर निकालने के लिए नहीं, बल्कि बिहार के ग्रामीण जनजीवन और अर्थव्यवस्था के लिए भी बेहद नाजुक समय है। खरीफ की सबसे बड़ी फसल, यानी धान की खेती का पूरा दारोमदार इसी बारिश पर टिका है। पहली अच्छी बरसात होते ही किसान भाई अपने खेतों का रुख करेंगे और धान का बिचड़ा डालने तथा रोपाई के काम में पूरी ताकत से जुट जाएंगे।

कम दबाव का क्षेत्र और 'एल नीनो' का सस्पेंस

अगर वैज्ञानिक नजरिए से समझें, तो मई-जून की बेहिसाब गर्मी के कारण मैदानी इलाकों की हवा गर्म होकर ऊपर उठ जाती है, जिससे यहां 'लो प्रेशर एरिया' (कम दबाव का क्षेत्र) बनता है। इसी खाली जगह को भरने के लिए समंदर से ठंडी और भारी मानसूनी हवाएं मैदानी भागों की तरफ दौड़ पड़ती हैं। हालांकि, इस साल प्रशांत महासागर में अंगड़ाई ले रहा 'एल नीनो' थोड़ा डरा जरूर रहा है, क्योंकि यह अक्सर मॉनसून की ताकत को सोख लेता है। बहरहाल, मौसम वैज्ञानिक उपग्रहों के जरिए पल-पल की बदलती तस्वीरों पर निगाह रखे हुए हैं।

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