न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
पटना : बिहार सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राज्यभर में 4954 एएनएम (ऑक्सिलरी नर्स मिडवाइफ) को नियुक्ति पत्र सौंपा। पटना के ऊर्जा ऑडिटोरियम में आयोजित भव्य समारोह का उद्घाटन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया। इस दौरान उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से चार एएनएम को अपने हाथों से नियुक्ति पत्र देकर कार्यक्रम की शुरुआत की।
Highlights:
- बिहार में 4954 एएनएम को नियुक्ति पत्र का वितरण
- मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने किया कार्यक्रम का उद्घाटन
- पटना के ऊर्जा ऑडिटोरियम में आयोजित हुआ समारोह
- स्वास्थ्य मंत्री Mangal Pandey समेत कई अधिकारी रहे मौजूद
- ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम
- मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में होगा सुधार
भव्य आयोजन के साथ शुरुआत
समारोह में दोनों उपमुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय , स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में आमंत्रित लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि हर गांव और हर स्वास्थ्य केंद्र तक बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जाएं।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, ये नियुक्तियां लंबे समय से लंबित प्रक्रिया का हिस्सा थीं, जिन्हें अब पूरा कर लिया गया है। इससे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और उपकेंद्रों में नर्सिंग स्टाफ की कमी काफी हद तक दूर होगी। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में इसका सकारात्मक असर देखने को मिलेगा।
बिहार में 4954 एएनएम को नियुक्ति पत्र का वितरण
लंबित प्रक्रिया को मिला अंजाम
एएनएम को स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। वे टीकाकरण, प्रसव सेवाओं, परिवार नियोजन, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य देखभाल और प्राथमिक उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इतनी बड़ी संख्या में एएनएम की नियुक्ति से जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होने की उम्मीद जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में एएनएम की उपलब्धता से गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को समय पर चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी। इससे मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में भी मदद मिलेगी।
मातृ-शिशु स्वास्थ्य पर फोकस
सरकार का कहना है कि इस पहल से जहां एक ओर युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा। आने वाले समय में स्वास्थ्य ढांचे को और मजबूत करने के लिए इसी तरह के कदम उठाए जाते रहेंगे।
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