न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
संजय कुमार / बेगूसराय : बेगूसराय जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (विजिलेंस), पटना की टीम ने बड़ी और सख्त कार्रवाई करते हुए प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी और एक जन वितरण प्रणाली (PDS) डीलर को 12 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई के बाद पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है और विभागीय कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह मामला निगरानी थाना कांड संख्या-03/2026, दिनांक 01 अप्रैल 2026 से जुड़ा हुआ है। तीयाय थाना क्षेत्र के निवासी एवं PDS विक्रेता पप्पू पासवान ने निगरानी विभाग में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके जन वितरण प्रणाली से जुड़े कार्य विशेषकर अनाज उठाव एवं लाइसेंस नवीनीकरण—के एवज में 12 हजार रुपये कमीशन की मांग की जा रही है।
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की मुख्यालय टीम ने मामले का गुप्त सत्यापन कराया। जांच के दौरान शिकायत पूरी तरह सही पाई गई। सत्यापन में यह भी स्पष्ट हुआ कि रिश्वत की रकम सीधे नहीं, बल्कि समसा पंचायत के PDS डीलर विद्यासागर के माध्यम से मांगी जा रही थी! इसके बाद विजिलेंस टीम ने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप बिछाया। गुरुवार को मानोपुर में पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा डीलर को रिश्वत की राशि दी गई। जैसे ही डीलर विद्यासागर ने उक्त राशि प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी शैलेन्द्र कुमार को सौंपी, पहले से घात लगाए विजिलेंस टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दोनों को रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। मौके से 12 हजार रुपये की पूरी रिश्वत राशि भी बरामद कर ली गई।गिरफ्तार प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी शैलेन्द्र कुमार वर्तमान में भगवानपुर प्रखंड में पदस्थापित हैं और मंसूरचक समेत दोनों के अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे थे। इस कारण उनका प्रभाव क्षेत्र व्यापक माना जा रहा था।
कार्रवाई के बाद दोनों आरोपियों को निगरानी थाना लाया गया, जहां उनसे गहन पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में अन्य संभावित संलिप्तता की भी जांच की जा रही है और जरूरत पड़ने पर आगे और गिरफ्तारी हो सकती है।
निगरानी विभाग के डीएसपी रणजीत कुमार ने बताया कि दोनों आरोपियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा।
इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। निगरानी विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी भी सरकारी कार्य के बदले रिश्वत की मांग की जाती है, तो बिना डर के इसकी शिकायत करें, ताकि ऐसे भ्रष्ट तत्वों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
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