न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
दिवाकर कुमार / मुंगेर - मुंगेर में स्थित बिहार वानिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान संस्थान (बीएफसीआरआई) को देश का दूसरा और बिहार का पहला वानिकी कॉलेज माना जाता है। इसका उद्देश्य पर्यावरण, वन्यजीव और कृषि वानिकी के क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन तैयार करना है। फरवरी 2023 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लगभग सौ एकड़ में फैले इस आधुनिक और इको-फ्रेंडली परिसर का उद्घाटन किया था। भूकंपरोधी संरचना, स्मार्ट क्लास और हरे-भरे वातावरण के साथ इसे उच्च स्तरीय शैक्षणिक संस्थान के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की गई थी। यहां बीएससी फॉरेस्ट्री, पर्यावरण विज्ञान और कृषि से जुड़े कोर्स संचालित किए जा रहे हैं, लेकिन शुरुआती दौर से ही यह संस्थान संसाधनों की कमी से जूझ रहा है, जिससे इसकी मूल परिकल्पना पर सवाल उठने लगे हैं।
हाईलाइट्स -
- मुंगेर का वानिकी कॉलेज संसाधनों की भारी कमी से जूझ रहा है।
- 74 स्वीकृत शिक्षकों में केवल 13 शिक्षक ही कार्यरत हैं।
- लैब, बस और अन्य बुनियादी सुविधाओं का गंभीर अभाव है।
- एक्रीडेशन को लेकर छात्रों और अभिभावकों में चिंता बढ़ी है।
शिक्षक, लैब और बुनियादी सुविधाओं का गंभीर अभाव
कॉलेज की सबसे बड़ी समस्या मानव संसाधन और आधारभूत ढांचे की कमी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, यहां 74 शिक्षकों और 130 गैर-शिक्षण कर्मचारियों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 13 शिक्षक और 27 नन-टीचिंग स्टाफ के सहारे पूरा संस्थान चल रहा है। कई विषयों की नियमित कक्षाएं स्थायी शिक्षकों की अनुपस्थिति में ऑनलाइन मोड में संचालित की जा रही हैं। छात्रों के लिए आवश्यक अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं अभी पूरी तरह विकसित नहीं हो पाई हैं, जिससे प्रैक्टिकल शिक्षा प्रभावित हो रही है। इसके अलावा, शैक्षणिक भ्रमण के लिए कॉलेज के पास अपनी बस तक नहीं है, जो फील्ड आधारित वानिकी शिक्षा के लिए एक बड़ी बाधा बन रही है।
एक्रीडेशन, छात्रों की चिंता और प्रशासन का पक्ष
वर्तमान में कॉलेज में लगभग तीन बैचों के करीब 100 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। छात्रों का कहना है कि शुरुआत में बुनियादी सुविधाओं जैसे बेंच-डेस्क तक की कमी थी, हालांकि धीरे-धीरे सुधार हुए हैं, लेकिन लाइब्रेरी, लैब और अन्य शैक्षणिक संसाधनों की अब भी भारी कमी है। सबसे बड़ी चिंता संस्थान के एक्रीडेशन को लेकर है, क्योंकि छात्रों और अभिभावकों को आशंका है कि यदि समय पर मान्यता की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई तो पहले बैच के छात्रों की डिग्री की वैधता और मूल्य प्रभावित हो सकता है। दूसरी ओर, कॉलेज प्रशासन का कहना है कि वे लगातार सरकार और विश्वविद्यालय से समन्वय कर रहे हैं। डीन डॉ. अनिल पासवान के अनुसार, कई विभागों में काम जारी है, लैब विकसित की जा रही है और स्मार्ट क्लास की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन शिक्षकों और स्टाफ की कमी अभी भी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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