'Rent Boyfriend' के नाम पर ठगी: अकेलेपन को निशाना बनाने वाला नया Cyber Scam, जान...

'Rent Boyfriend'

'Rent Boyfriend' के नाम पर ठगी: अकेलेपन को निशाना बनाने वाला नया Cyber Scam, जानिए क्या है इसकी सच्चाई

हैदराबाद में सामने आए 'Rent Boyfriend' विज्ञापनों ने ऑनलाइन ठगी के एक नए तरीके को उजागर किया है.

rent boyfriend के नाम पर ठगी अकेलेपन को निशाना बनाने वाला नया cyber scam जानिए क्या है इसकी सच्चाई 

न्यूज़11 भारत 
डिजिटल/डेस्क:
हैदराबाद में सामने आए 'Rent Boyfriend' विज्ञापनों ने ऑनलाइन ठगी के एक नए तरीके को उजागर किया है. आकर्षक तस्वीरों, सस्ते डेटिंग पैकेज और सोशल मीडिया के जरिए लोगों को फंसाकर एडवांस पेमेंट लेने के बाद आरोपी संपर्क तोड़ देते हैं.

50% छूट वाले ऑफर ने खींचा ध्यान
8 अगस्त 2026 को हैदराबाद के पुलिस कमिश्नर वीसी सज्जनार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ऐसे विज्ञापनों को लेकर लोगों को आगाह किया. पोस्टरों में आकर्षक युवकों के साथ कॉफी, फिल्म या दूसरे कार्यक्रमों में जाने के लिए भारी छूट का दावा किया गया था. पहली नजर में ये विज्ञापन किसी नए तरह की डेटिंग या कंपेनियनशिप सर्विस जैसे लग सकते थे. लेकिन पुलिस की चेतावनी के बाद सामने आया कि इनके पीछे साइबर ठगी का नेटवर्क सक्रिय था. विज्ञापनों में अलग-अलग सेवाओं के लिए तय पैकेज बताए गए थे. कॉफी डेट के लिए करीब ₹499, मूवी के लिए ₹1,249, शादी समारोह में साथ जाने के लिए ₹1,999 और 10 घंटे की सेवा के लिए ₹4,499 तक की रकम मांगी गई. भुगतान QR कोड या डिजिटल वॉलेट के जरिए कराया जाता था. पैसा मिलते ही कथित तौर पर संपर्क बंद कर दिया जाता था.

पुराना आइडिया, ठगी का नया इस्तेमाल
किसी व्यक्ति को पैसे देकर सामाजिक कार्यक्रम या मनोरंजन के लिए साथ ले जाने की अवधारणा बिल्कुल नई नहीं है. जापान में 'Rent a Friend' जैसी सेवाओं ने इस मॉडल को लोकप्रिय बनाया और बाद में चीन सहित दूसरे देशों में भी ऐसी सेवाएं सामने आईं. भारत में भी समय-समय पर ‘रेंट ए गाय’, ‘हायर ए फ्रेंड’ और ‘रेंट ए बॉयफ्रेंड’ जैसे ऑनलाइन मॉडल दिखाई देते रहे हैं. इनका इस्तेमाल आमतौर पर कैजुअल आउटिंग, फिल्म देखने या सामाजिक कार्यक्रमों में साथ पाने के लिए बताया गया. साइबर अपराधियों ने इसी परिचित अवधारणा को ठगी के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है. असली सेवा जैसा दिखने वाला पैकेज, तय कीमत और डिजिटल भुगतान विकल्प संभावित पीड़ित के मन में भरोसा पैदा करते हैं.

अकेलेपन की बढ़ती अर्थव्यवस्था पर अपराधियों की नजर
ऑनलाइन कंपेनियनशिप सेवाओं की लोकप्रियता ने एक ऐसे बाजार को जन्म दिया है जहां लोग दोस्ती, बातचीत या साथ के लिए भुगतान करने को तैयार होते हैं. यही वजह है कि भावनात्मक जरूरतों से जुड़े ऑफर साइबर अपराधियों के लिए आकर्षक बन रहे हैं. भारत में साइबर अपराध की शिकायतों में भी पिछले कुछ वर्षों में तेज वृद्धि हुई है. रोमांस और भरोसे पर आधारित ठगी दुनिया भर में सबसे महंगी ऑनलाइन धोखाधड़ियों में शामिल हो चुकी है. अमेरिका के FBI Internet Crime Complaint Center के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में रोमांस-संबंधी धोखाधड़ी की 23,159 शिकायतें दर्ज हुईं और इनमें करीब 929.3 मिलियन डॉलर के नुकसान की जानकारी दी गई. यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक था.

AI ने बढ़ाई फर्जी पहचान बनाने की क्षमता
साइबर ठगी का यह मॉडल अब केवल नकली नाम और फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल तक सीमित नहीं है. AI टूल्स ने अपराधियों के लिए ऐसी तस्वीरें और प्रोफाइल तैयार करना आसान कर दिया है, जो पहली नजर में वास्तविक दिखाई दे सकती हैं. फर्जी विज्ञापनों में इस्तेमाल होने वाली आकर्षक पुरुषों की तस्वीरें स्टॉक फोटो या AI से बनाई गई हो सकती हैं. इससे अपराधियों को वास्तविक व्यक्ति की पहचान उजागर किए बिना एक भरोसेमंद ऑनलाइन प्रोफाइल तैयार करने में मदद मिलती है. AI का इस्तेमाल केवल तस्वीरों तक सीमित नहीं है. नकली चैट, आवाज और वीडियो तैयार करने की तकनीक भी तेजी से उपलब्ध हो रही है. इससे संभावित पीड़ित के लिए यह पहचानना और मुश्किल हो सकता है कि वह वास्तव में किससे बातचीत कर रहा है.

देश के अलग-अलग हिस्सों में दिखे मिलते-जुलते मामले
'Rent Boyfriend' मामला किसी एक तरह की ठगी तक सीमित नहीं है. भारत में हनी-ट्रैप, फर्जी रोमांस प्रोफाइल, ब्लैकमेल और भावनात्मक विश्वास का फायदा उठाकर पैसे ऐंठने के कई मामले सामने आते रहे हैं. जयपुर में सामने आए एक मामले में AI-आधारित तस्वीरों और वीडियो के संभावित इस्तेमाल की जांच की गई थी. वहीं मुंबई में एक महिला को उसके खोए हुए साथी से दोबारा मिलाने का भरोसा देकर लाखों रुपये का सामान और नकदी ठगे जाने का मामला सामने आया. गुजरात में भी एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर पर एक कारोबारी को कथित हनी-ट्रैप में फंसाकर ब्लैकमेल करने के आरोप में कार्रवाई हुई थी. इन घटनाओं से यह संकेत मिलता है कि साइबर ठगी अब केवल तकनीकी कमजोरी का फायदा नहीं उठाती. अपराधी लोगों की भावनात्मक स्थिति, भरोसे और सामाजिक जरूरतों को भी निशाना बना रहे हैं.

‘ग्रूमिंग’ के जरिए भरोसा बनाने की रणनीति
रोमांस और कंपेनियनशिप से जुड़े स्कैम में अपराधी आमतौर पर सीधे पैसे की मांग नहीं करते. पहले वे पीड़ित का भरोसा जीतने की कोशिश करते हैं. इस प्रक्रिया में लगातार तारीफ करना, सामने वाले की पसंद और रुचियों को अपनाना तथा खुद को एक आदर्श साथी या भरोसेमंद व्यक्ति के रूप में पेश करना शामिल हो सकता है. कुछ मामलों में पीड़ित को दोस्तों या परिवार से बातचीत छिपाने के लिए भी प्रेरित किया जाता है. इसके बाद छोटी रकम की मांग सामने आती है...जैसे बुकिंग चार्ज, सिक्योरिटी डिपॉजिट या कैंसिलेशन फीस. कम रकम होने के कारण पीड़ित को शुरुआत में यह मांग सामान्य लग सकती है. 'Rent Boyfriend' विज्ञापनों में भी अलग-अलग सेवाओं के लिए तय कीमतें इसी मनोवैज्ञानिक तरीके से भरोसा पैदा कर सकती हैं. एक स्पष्ट पैकेज और निश्चित कीमत किसी अनजान ऑनलाइन ऑफर को भी वैध बिजनेस जैसा दिखा सकती है.

किन संकेतों से पहचानें फर्जी ऑफर?
ऐसे विज्ञापनों में कुछ संकेत बार-बार दिखाई दे सकते हैं. मसलन, बेहद आकर्षक तस्वीरों के साथ असामान्य रूप से सस्ते ऑफर, केवल DM के जरिए बातचीत और किसी वास्तविक कार्यालय या सत्यापित बिजनेस पहचान का अभाव. अगर कोई व्यक्ति या पेज मिलने से पहले UPI, QR कोड या डिजिटल वॉलेट के जरिए एडवांस फीस मांगता है, तो इसे गंभीर चेतावनी संकेत माना जाना चाहिए. वीडियो कॉल से बचना, अचानक व्यक्तिगत तस्वीरें मांगना, बातचीत को परिवार और दोस्तों से छिपाने का दबाव बनाना या तुरंत निर्णय लेने के लिए मजबूर करना भी खतरे के संकेत हैं.

खुद को सुरक्षित रखने के लिए क्या करें?
किसी अनजान सोशल मीडिया अकाउंट को केवल आकर्षक तस्वीरों, फॉलोअर्स या अच्छी तरह डिजाइन किए गए पोस्ट के आधार पर भरोसेमंद न मानें. बुकिंग या मुलाकात से पहले किसी अनजान व्यक्ति को एडवांस रकम, सिक्योरिटी डिपॉजिट या अन्य शुल्क न भेजें. अपनी निजी तस्वीरें, घर का पता, पहचान संबंधी दस्तावेज, बैंकिंग जानकारी और OTP जैसी संवेदनशील जानकारी भी साझा न करें. अगर कोई ऑनलाइन ऑफर वास्तविक लगता है, तब भी स्वतंत्र स्रोतों से उसकी पहचान और व्यवसायिक जानकारी की पुष्टि करना जरूरी है.

ठगी हो जाए तो तुरंत उठाएं कदम
अगर किसी व्यक्ति को लगता है कि वह साइबर ठगी का शिकार हो गया है, तो सबसे पहले आरोपी से संपर्क बंद करना चाहिए और किसी भी तरह का अतिरिक्त भुगतान नहीं करना चाहिए. चैट, प्रोफाइल, फोन नंबर, QR कोड, स्क्रीनशॉट और भुगतान से जुड़े सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखें. इसके बाद तुरंत आधिकारिक साइबर अपराध तंत्र के माध्यम से शिकायत दर्ज करें. भारत में वित्तीय साइबर फ्रॉड की स्थिति में 1930 पर संपर्क करना और cybercrime.gov.in के जरिए रिपोर्ट करना महत्वपूर्ण कदम हैं. जल्दी शिकायत करने से संबंधित एजेंसियों को संदिग्ध लेनदेन पर कार्रवाई और संभावित रूप से रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने का मौका मिल सकता है.

कानून मौजूद, लेकिन प्लेटफॉर्म की भूमिका भी अहम
ऑनलाइन पहचान का गलत इस्तेमाल और धोखाधड़ी भारत में पहले से ही कानूनी कार्रवाई के दायरे में आते हैं. परिस्थितियों के आधार पर Information Technology Act की धाराएं और भारतीय न्याय संहिता के धोखाधड़ी से जुड़े प्रावधान लागू हो सकते हैं. सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर भी शिकायतों के निपटारे और गैर-कानूनी सामग्री के खिलाफ कार्रवाई के लिए नियामकीय जिम्मेदारियां तय हैं. हालांकि, विशेषज्ञों के सामने बड़ी चुनौती यह है कि फर्जी अकाउंट और AI-निर्मित सामग्री वास्तविक उपयोगकर्ताओं तक पहुंचने से पहले कैसे रोकी जाए. खास तौर पर ऐसे पेज, जो खुद को व्यावसायिक सेवा के रूप में पेश करते हैं, उनकी पहचान और भुगतान संबंधी गतिविधियों की बेहतर जांच की जरूरत है.

AI युग में डिजिटल भरोसे की नई चुनौती
'Rent Boyfriend' जैसा स्कैम यह दिखाता है कि साइबर अपराध अब केवल नकली लिंक या फर्जी बैंक कॉल तक सीमित नहीं रह गया है. अपराधी सामाजिक जरूरतों और आधुनिक डिजिटल संस्कृति को समझकर उसी के अनुरूप अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं. AI ने फर्जी तस्वीरों और डिजिटल पहचान बनाना आसान किया है, जबकि सोशल मीडिया ने ऐसे ऑफर को बड़े पैमाने पर लोगों तक पहुंचाने का रास्ता उपलब्ध कराया है. इसलिए किसी ऑनलाइन रिश्ते, कंपेनियनशिप सर्विस या आकर्षक ऑफर की असली पहचान केवल उसकी तस्वीर या प्रोफाइल से तय नहीं की जा सकती.

अकेलापन शर्म की बात नहीं है, लेकिन इसी भावनात्मक जरूरत को आधार बनाकर पैसे मांगने वाले अनजान ऑनलाइन ऑफर से बेहद सावधान रहना जरूरी है. आकर्षक तस्वीर, बड़ी छूट और प्रोफेशनल दिखने वाला पोस्ट किसी सेवा के वास्तविक होने की गारंटी नहीं है.

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