आशिष शास्त्री/न्यूज11 भारत
सिमडेगा/डेस्क: सिमडेगा: भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाने वाला अनंत चतुर्दशी का पर्व इस वर्ष 25 सितंबर, शुक्रवार को श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया जाएगा. भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की आराधना को समर्पित इस व्रत में 14 गांठों वाले अनंत सूत्र का विशेष महत्व है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अनंत सूत्र की प्रत्येक गांठ सृष्टि के 14 लोकों का प्रतीक मानी जाती है. यही कारण है कि यह पर्व केवल पूजा-व्रत तक सीमित नहीं, बल्कि सृष्टि की अनंतता और भगवान विष्णु के व्यापक स्वरूप का स्मरण कराने वाला पर्व माना जाता है.
अनंत स्वरूप की होती है आराधना
स्कंद पुराण, ब्रह्म पुराण और भविष्यादि पुराणों में अनंत चतुर्दशी व्रत का उल्लेख मिलता है. इस दिन श्रद्धालु भगवान विष्णु की विधिवत पूजा-अर्चना करते हैं और अनंत व्रत की कथा का श्रवण करते हैं. धार्मिक परंपरा में इस दिन उदयव्यापिनी चतुर्दशी को महत्व दिया जाता है. भक्त भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप का ध्यान करते हुए सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं.
14 गांठों में 14 लोकों का रहस्य
सिमडेगा के प्रसिद्ध प्रिंस चौक शक्ति स्थल के आचार्य श्याम सुंदर मिश्र ने बताया कि अनंत चतुर्दशी की पूजा में तैयार किया जाने वाला 14 गांठों वाला धागा इस पर्व की सबसे विशिष्ट परंपराओं में शामिल है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इसकी 14 गांठें सृष्टि के 14 लोकों का प्रतिनिधित्व करती हैं. इनमें भू, भुवः, स्वः, जन, तप और सत्य जैसे ऊर्ध्व लोक तथा अतल, वितल, सुतल आदि अधोलोक शामिल हैं.
आचार्य ने बताया कि अनंत सूत्र को भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप का प्रतीक मानकर पूजा के बाद धारण किया जाता है. मान्यता है कि यह सूत्र भक्त को संकटों से रक्षा और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना से जोड़ा जाता है. परंपरा के अनुसार पुरुष इसे दाहिनी भुजा और महिलाएं बाईं भुजा में धारण करती हैं.
महाभारत काल से भी जुड़ी मान्यता
आचार्य श्याम सुंदर मिश्र ने अनुसार अनंत चतुर्दशी की कथा का संबंध महाभारत काल से भी जोड़ा जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार वनवास के दौरान पांडवों ने भगवान श्रीकृष्ण की सलाह पर अनंत व्रत किया था. कथा परंपरा में माना जाता है कि इस व्रत के माध्यम से उन्होंने भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की आराधना की और अपने जीवन में आए संकटों से उबरने की कामना की.
कथा श्रवण और पारिवारिक मंगल की कामना
इस दिन परिवार और बंधु-बांधवों के साथ अनंत व्रत की कथा सुनने की परंपरा है. श्रद्धालु भगवान विष्णु की पूजा के बाद अनंत सूत्र को विधिपूर्वक पूजते हैं और उसे धारण करते हैं. धार्मिक मान्यताओं में अनंत व्रत को धन, संतान, सुख-समृद्धि और पारिवारिक मंगल की कामना से जुड़ा बताया गया है.
अनंत चतुर्दशी का संदेश केवल एक धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है. 14 गांठों वाला अनंत सूत्र भक्तों को सृष्टि की विशालता, भगवान विष्णु की अनंत सत्ता और जीवन में आस्था के महत्व का स्मरण कराता है. भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी को जब श्रद्धालु अनंत सूत्र धारण करेंगे, तो उसके साथ सदियों पुरानी आस्था, परंपरा और भगवान विष्णु के प्रति समर्पण की भावना भी जुड़ी होगी.
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