रांजाबुरु खदान में भागीदारी की मांग को लेकर नौ दिनों से चल रहा अनिश्चितकालीन आंदोलन

रांजाबुरु खदान में भागीदारी की मांग को लेकर नौ दिनों से चल रहा अनिश्चितकालीन आंदोलन

रांजाबुरु खदान में भागीदारी की मांग को लेकर नौ दिनों से चल रहा अनिश्चितकालीन आंदोलन

न्यूज11 भारत

चाईबासा/डेस्क: पश्चिमी सिंहभूम गुवा सेल के रांजाबुरु खदान क्षेत्र में 75 प्रतिशत स्थानीय रोजगार, रेक लोडिंग एवं ट्रांसपोर्टिंग कार्य में भागीदारी की मांग को लेकर नौ दिनों से चल रहा अनिश्चितकालीन आंदोलन मंगलवार को त्रिपक्षीय वार्ता के बाद समाप्त हो गया. सारंडा विकास समिति जाम कुंडिया दुईया के बैनर तले चल रहे इस आंदोलन का नेतृत्व सारंडा पीढ़ मानकी लागुड़ा देवगम, छोटानागरा पंचायत मुखिया राजु सांडिल तथा 10 गांवों के ग्रामीण कर रहे थे. 

आंदोलन स्थल पर झारखंड सरकार के परिवहन, राजस्व, निबंधन व भूमि सुधार मंत्री दीपक बिरुवा स्वयं पहुंचे. उनके साथ खदान के ठेकेदार मां सरला प्राइवेट वर्क, एसडीओ महेंद्र छोटन उरांव (महाप्रबंध क)सेल गुआ तथा बीडीओ पप्पू रजक मौजूद रहे. 

सभी पक्षों के बीच लंबी वार्ता चली, जिसके बाद आंदोलनरत ग्रामीणों की चार प्रमुख मांगों पर सहमति बनी. वार्ता के दौरान दो मांगों पर तत्काल सहमति दी गई. पहली मांग के तहत यह निर्णय लिया गया कि राजाबुरु खदान से प्रभावित स्थानीय ग्रामीणों को उनकी कार्य क्षमता के अनुसार प्राथमिकता के आधार पर रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा. दूसरी मांग के तहत सारंडा विकास समिति जाम कुंडिया दुईया को ही पानी टैंकर के माध्यम से सड़कों पर पानी छिड़काव का कार्य सौंपा जाएगा. शेष दो मांगों पर कहा गया कि संबंधित सीओटी (क्लियरेंस) प्राप्त होने के बाद चरणबद्ध तरीके से बैठक कर निर्णय लिया जाएगा. 

इसी बीच 11 गांव मुंडा मानकी रैयत संघ के बैनर तले मुंडा-मानकी, डाकुआ एवं ग्रामीणों ने मंत्री को अलग से मांग पत्र सौंपा. इसमें कहा गया कि यह क्षेत्र संविधान की पांचवीं अनुसूची तथा पेसा कानून के अंतर्गत आता है, इसलिए ग्रामसभा से समुचित परामर्श अनिवार्य है. संघ ने आरोप लगाया कि परियोजना में ग्रामसभा से विधिवत सहमति नहीं ली गई, जो पेसा की धारा 4(1) का उल्लंघन है. मांग पत्र में झारखंड सरकार की 75 प्रतिशत स्थानीय नियोजन नीति को सख्ती से लागू करने, सीएसआर एवं डीएमएफटी फंड का पारदर्शी उपयोग प्रभावित गांवों में शिक्षा, शुद्ध पेयजल एवं स्वास्थ्य सुविधाओं पर खर्च करने तथा इसकी निगरानी ग्रामसभा से कराने की मांग की गई. 

कारो नदी के प्रदूषण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया. ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि खदान से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थों के कारण नदी का जल प्रदूषित हो रहा है, जिससे बीमारियां फैलने की आशंका बढ़ रही है. इसके स्थायी समाधान की मांग की गई. मंत्री दीपक बिरुवा ने आश्वासन दिया कि स्थानीय युवाओं के अधिकारों की अनदेखी नहीं होने दी जाएगी. उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में वादों का पालन नहीं हुआ तो सेल प्रबंधन के खिलाफ बड़ा आंदोलन किया जाएगा. वार्ता के सकारात्मक निष्कर्ष के बाद ग्रामीणों ने आंदोलन समाप्ति की घोषणा की और क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल होगी.
 
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