उत्तम विश्वकर्मा/न्यूज़ 11 भारत
राजगंज/डेस्क: श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह के पावन अवसर पर छठा दिवस भक्ति, श्रद्धा एवं उल्लास के साथ संपन्न हुआ. कथा स्थल पर शाम से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जहां भक्तों ने श्रद्धा भाव से कथा श्रवण कर आध्यात्मिक आनंद प्राप्त किया.
परम पूज्य आचार्य श्रीकन्हैया द्विवेदी जी महाराज ने अपने प्रवचन में भगवान श्रीकृष्ण एवं माता रुक्मिणी के दिव्य विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया. उन्होंने बताया कि माता रुक्मिणी ने भगवान श्रीकृष्ण को ही अपना सर्वस्व मानते हुए उन्हें पति रूप में प्राप्त करने का संकल्प लिया था. भगवान श्रीकृष्ण ने उनकी अटूट भक्ति और प्रेम को स्वीकार करते हुए रुक्मिणी हरण कर उनसे विवाह किया. कथा सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और पूरा पंडाल “राधे-राधे” एवं “जय श्री कृष्ण” के जयघोष से गूंज उठा.
दिव्य लीला के वर्णन से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया और श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर दिखाई दिए. कथा उपरांत झांकी के माध्यम से रुक्मिणी विवाह एवं महारास की आकर्षक प्रस्तुति की गई, जिसे देखकर उपस्थित श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए. कलाकारों की सजीव प्रस्तुति पर पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा.
इस अवसर पर आयोजन समिति एवं समस्त भक्तगणों का सहयोग सराहनीय रहा. कार्यक्रम का समापन भजन-कीर्तन एवं आरती के साथ हुआ, जहां श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण से सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की. इस प्रकार कथा का छठा दिवस भक्ति, श्रद्धा और आनंद के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ.
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