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रांची/डेस्क: रिनपास (रांची इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो-साइकियाट्री एंड एलाइड साइंसेज) के ओपीडी परिसर में 10 जुलाई 2026 को हुई घटना के बाद संस्थान प्रशासन ने जांच के लिए चार सदस्यीय समिति का गठन किया है. निदेशक के निर्देश पर उपनिदेशक (प्रशासन) की अध्यक्षता में आयोजित आपात बैठक में यह निर्णय लिया गया.
गठित जांच समिति की अध्यक्षता डॉ. अमूल रंजन सिंह करेंगे. समिति में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विनोद कुमार महतो, उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पी. पी. साह और डॉ. मनीषा किरण को सदस्य बनाया गया है. समिति को घटना से जुड़े सभी तथ्यों और परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच कर 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है. रिपोर्ट मिलने के बाद प्रचलित नियमों और कानूनी प्रावधानों के तहत आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी.
घटना के बाद संस्थान में अनुशासन और कार्य संस्कृति को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण फैसले भी लिए गए. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी अधिकारी, चिकित्सक, कर्मचारी या अन्य व्यक्ति को नशे की हालत में संस्थान परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी. साथ ही, परिसर में किसी भी प्रकार के मादक पदार्थों के सेवन पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा.
इसके अलावा संस्थान परिसर में हथियार, आग्नेयास्त्र, धारदार हथियार, विस्फोटक या अन्य खतरनाक सामग्री लाने पर भी पूरी तरह रोक लगा दी गई है. प्रशासन ने यह भी निर्देश दिया है कि रिनपास से संबंधित किसी भी दस्तावेज, सूचना, वीडियो या फोटो को निदेशक या उपनिदेशक की पूर्व अनुमति के बिना प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक या सोशल मीडिया पर साझा करना प्रशासनिक आदेश की अवहेलना माना जाएगा और संबंधित व्यक्ति के खिलाफ सेवा नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.
बैठक में सभी अधिकारियों, चिकित्सकों और कर्मचारियों के लिए निर्धारित एवं शालीन ड्रेस कोड का पालन अनिवार्य करने का भी निर्णय लिया गया. प्रशासन ने कहा है कि इन निर्देशों का उल्लंघन प्रशासनिक त्रुटि माना जाएगा और संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
रिनपास प्रशासन ने अपने बयान में कहा कि संस्थान में अनुशासन, गरिमा, पारदर्शिता और रोगियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है. प्रशासन ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता, अव्यवहारिक आचरण या संस्थान की कार्यप्रणाली को प्रभावित करने वाली गतिविधियों को किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. साथ ही सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से संस्थान की गरिमा एवं सेवा मूल्यों के अनुरूप अपने दायित्वों का निर्वहन करने की अपेक्षा जताई गई है.