रांची: मुंहबोले भाई ने ली मासूम की जान, लापता होने की कहानी गढ़ी.. गयाजी में छुपके से कराया अंतिम संस्कार

By : Mansi Kumari
रांची: मुंहबोले भाई ने ली मासूम की जान, लापता होने की कहानी गढ़ी.. गयाजी में छुपके से कराया अंतिम संस्कार

न्यूज़11 भारत
रांची/डेस्क:
राजधानी रांची के रातू थाना क्षेत्र स्थित झखराटांड से लापता 13 वर्षीय बच्ची राजनंदिनी के मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ हैं. शुरुआती तौर पर इसे गुमशुदगी का मामला बताया जा रहा था, लेकिन जांच के दौरान सामने आया कि बच्ची की हत्या उसी के मुंहबोले भाई राहुल उर्फ अक्षय ने कर दी थी. घटना 13 मार्च की रात की बताई जा रही हैं. जांच में सामने आया कि हत्या के बाद आरोपी परिवार ने पूरे मामले को छिपाने के लिए सोची-समझी साजिश रची. बच्ची के शव को एंबुलेंस से गयाजी ले जाकर गुप्त तरीके से अंतिम संस्कार कर दिया गया. हत्या के बाद आरोपी परिवार तीन दिनों तक घर से गायब रहा. 16 मार्च को लौटने के बाद गांव और पुलिस को गुमराह करने के लिए बच्ची के लापता होने की कहानी गढ़ी गई. इतना ही नहीं, शक से बचने के लिए घर में बंद कमरे में गरुड़ पुराण का पाठ भी कराया गया, ताकि लोगों को लगे कि परिवार शोक में हैं.

करीब चार दिनों तक आरोपी परिवार पुलिस और ग्रामीणों को भ्रमित करता रहा लेकिन लगातार पूछताछ के दबाव में पांचवें दिन राहुल उर्फ अक्षय ने सच्चाई कबूल कर ली. इसके बाद पूरे मामले की परतें खुलती चली गई. पुलिस जांच में सामने आया है कि घटना के पीछे पारिवारिक विवाद और कथित प्रेम-प्रसंग की भूमिका थी. बताया गया कि आरोपी सुबोध पाठक और उसके बेटे अक्षय के बीच अक्सर झगड़े होते थे. घटना की रात भी विवाद हुआ, जिसमें राजनंदिनी ने सुबोध पाठक का पक्ष लिया. इसी बात से नाराज होकर अक्षय ने गला दबाकर उसकी हत्या कर दी. साथ ही बच्ची का राहुल के साले के साथ प्रेम-प्रसंग भी परिवार को नागवार गुजर रहा था, जिसे लेकर भी तनाव था.

मामले में कमलेश मेमोरियल अस्पताल के संचालक अमरेश पाठक की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही हैं. आरोप है कि घटना के बाद वे मौके पर पहुंचा और बच्ची को मृत घोषित किया. बाद में शव को एंबुलेंस से गयाजी ले जाकर अंतिम संस्कार कराने में भी सहयोग किया. फिलहाल वह फरार हैं.

राजनंदिनी मूल रूप से औरंगाबाद जिले के अंबा गांव की रहने वाली थी. उसके पिता आर्थिक रूप से कमजोर और दिव्यांग हैं. ऐसे में परिचित होने के कारण सुबोध पाठक उसे अपने साथ रांची ले आए थे. पिछले करीब आठ वर्षों से वह इसी परिवार के साथ रह रही थी और उन्हें ही अपना परिवार मानती थी. यहां तक कि सुबोध पाठक ने राजनंदिनी के आधार कार्ड में भी पिता के स्थान पर अपना नाम दर्ज करा रखा था. धीरे-धीरे राजनंदिनी ने पाठक परिवार को ही अपना असली परिवार मान लिया था. ग्रामीण एसपी प्रवीण पुष्कर के नेतृत्व में हुई जांच के बाद पुलिस ने आरोपी सुबोध पाठक और उसके पुत्र अक्षय पाठक को गिरफ्तार कर लिया हैं. एंबुलेंस चालक पिंटू कुमार को हिरासत में लिया गया है, जबकि मुख्य आरोपी की मदद करने वाला अस्पताल संचालक फरार हैं. पुलिस ने एंबुलेंस को जब्त कर लिया है और मामले की आगे की जांच जारी हैं. 

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