न्यूज़11 भारत
रांची/डेस्क: होली का पर्व करीब आते ही होलिका दहन की तारीख को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति बन गई हैं. इस बार कुछ लोग कह रहे है कि होलिका दहन 2 मार्च, 2026 को करना चाहिए, जबकि कुछ लोग मानते है कि 3 मार्च को करना उचित होगा. इस कन्फ्यूजन को दूर करने के लिए ज्योतिषाचार्यों ने तिथियों और मुहूर्तों का विस्तृत विश्लेषण पेश किया हैं.
ज्योतिषाचार्य प्रवीण मिश्र के अनुसार, इस बार होलिका दहन 2 मार्च को शाम 6 बजकर 22 मिनट से रात 8 बजकर 53 मिनट तक करना सबसे शुभ रहेगा. इस समय को प्रदोष काल कहा जाता है और शास्त्र अनुसार, प्रदोष काल में होलिका दहन करना बेहद फलदायक माना जाता है लेकिन ज्योतिषाचार्य पंडित वेद प्रकाश मिश्रा ने बताया कि 2 मार्च को भद्रा का प्रभाव रहेगा. भद्रा मुख्य मुहूर्त को अशुभ बनाती हैं. इसलिए इस दिन होलिका दहन भद्रा पूंछ काल में करना उचित रहेगा. इस हिसाब से भद्रा पूंछ काल का समय रात 12 बजकर 50 मिनट से 2 बजकर 2 मिनट तक हैं.
3 मार्च को होलिका दहन
हरिद्वार के वरिष्ठ पंडित मनोज त्रिपाठी के अनुसार, 3 मार्च को भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा, लेकिन इस दिन प्रदोष काल में पूर्णिमा नहीं मिल रही हैं. हालांकि, सुबह की पूर्णिमा के आधार पर शास्त्र इसे अनुमति देते हैं. ऐसे में भद्रा रहित समय में 3 मार्च को होलिका दहन करना भी सही माना जा सकता हैं. हर साल होलिका दहन के अगले दिन ही होली मनाई जाती है, लेकिन इस बार 3 मार्च को चंद्रग्रहण लग रहा हैं.
चंद्रग्रहण का समय: 3 मार्च, दोपहर 3:21 बजे से शाम 6:46 बजे तक
सूतक काल: 3 मार्च सुबह 6:20 बजे से शाम 6:46 बजे तक
चंद्रग्रहण और सूतक काल के कारण 3 मार्च को होली नहीं खेली जा सकेगी. इसलिए इस साल रंगबरी होली 4 मार्च 2026, बुधवार को मनाई जाएगी.
चंद्रग्रहण का प्रभाव और दृश्यता
यह चंद्रग्रहण केवल भारत में ही नहीं, बल्कि पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर और अमेरिका में भी दिखाई देगा. इस कारण से पूरे भारत में होली का पर्व 4 मार्च को मनाना उपयुक्त रहेगा.
यह भी पढ़े: Jharkhand Weather: झारखंड में मार्च में ही गर्मी ने पकड़ी रफ्तार, दोपहर में सूरज दे रहा तेज तपिश