न्यूज11 भारत
रांची/डेस्क: पश्चिम बंगाल में भगवा राज आने के बाद बहुत कुछ बदलने वाला है. बंगाल के नये मुख्यमंत्री अपनी पहली कैबिनेट की बैठक में सरकारी विभागों में कब्जा जमाए 900 रिटायर्ड अधिकारियों (जिन्हें ममता सरकार ने एक्सटेंशन दिया था) की छुट्टी कर दी है. अब एक बहुत बड़ा फैसला शुभेन्दु सरकार ने लिया है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नक्शेकदम पर चलते हुए शुभेन्दु अधिकारी ने सड़कों पर नमाज और पूजा पाठ करने की मनाही कर दी है. इतना ही नहीं, ममता बनर्जी के राज में पिछले जो दो चुनाव (2021 विधानसभा, 2024 लोकसभा) हुए, उनमें हुई हिंसा की जड़ तक जाने का फैसला लिया है.
शुभेन्दु अधिकारी कार्यभार संभालते ही रेस हो गए हैं. उन्होंने आदेश जारी कर दिया है कि धार्मिक स्थलों (मंदिर और मस्जिद) पर लाउडस्पीकर की आवाज कम होगी. सड़कों पर धार्मिक गतिविधियां नियंत्रित होंगी. ताकि इन गतिविधियों के कारण सड़कों पर लगने वाले जाम को रोका जा सके. सोमवार को नबन्ना में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के साथ अपनी पहली औपचारिक बैठक में मुख्यमंत्री शुभेन्दु ने की नई कानून-व्यवस्था का स्पष्ट और सख्त आदेश दिया है.
धार्मिक स्थलों को लेकर शुभेन्दु अधिकारी का निर्देश
शुभेन्दु अधिकारी ने पुलिस प्रशासन को निर्देश दिया है कि वे यह सुनिश्चित करें धार्मिक स्थलों के लाउडस्पीकर की आवाज परिसर से बाहर न आए। विशेष अवसरों को छोड़कर, सड़कों पर हर प्रकार की सार्वजनिक प्रार्थना सभा या धार्मिक गतिविधियों की अनुमति नहीं है. इसके कारण शहरों की ट्रैफिक व्यवस्था बिगड़नी नहीं चाहिए और आम जनता को परेशानी नहीं होनी चाहिए.
अवैध कारोबार औरअपराध सिंडिकेट पर तगड़ा प्रहार
अधिकारियों के साथ बैठक में मुख्यमंत्री शुभेन्दु ने सरकार की नीति और कार्यशैली को स्पष्ट किया कि सरकार राज्य में अवैध कारोबाग और अपराध सिंडिकेट को बर्दाश्त नहीं करेगी. अब अवैध कोयला खनन, रेत उत्खनन और पशु तस्करी जैसे अपराधों बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे. इन गतिविधियों पर सरकार ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर चलेगी, अधिकारियों के सामने स्पष्ट कर दिया गया. महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों पर नकेल कसी जाए इसका भी सख्त निर्देश दिया गया. शुभेन्दु सरकार ने एक और भी बड़ा काम साम्प्रदायिक हिंसा रोकने के लिएकिया है, वह यह कि पुलिस को आदेश दिया गया है कि राज्य में मौजूद अवैध हथियारों को तुरंत बरामद किया जाए और सांप्रदायिक हिंसा भड़काने वालों के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं के तहत कार्रवाई की जाए.
2021 और 2024 की चुनावी हिंसा की फाइलें खुलेंगी
ऐसा नहीं है कि ममता बनर्जी के राज में जो कुछ हो गया, वह बस हो गया कि तर्ज पर मान नहीं लिया जाएगा. बल्कि अब पुराने अपराधों की भी फाइलें खुलेंगी और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर गाज गिरनी तय है. पिछली सरकार के दौरान हुई चुनावी हिंसा के पीड़ितों को न्याय दिलाने का भी काम होगा. अधिकारियों को निर्देश दिया गया हैं कि 2021 और 2024 के चुनावों के बाद हुई हिंसा के मामलों को फिर से खोला जाए। बता दें कि लगभग 1,300 से ज्यादा ऐसे मामले हैं जो केवल जीडी एंट्री के तौर पर दर्ज थे, अब उन उनकी गहन जांच होगी, आरोपियों की गिरफ्तारी होगी और पीड़ितों को न्याय दिलाया जाएगा.
यह भी पढ़ें: 'आप इनसान है' बताना नहीं होगा आसान, CAPTCHA के लिए QR Code से बतानी होगी पहचान, GOOGLE की नई पहल