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रांची/डेस्कः- बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने का पूरा मन बना चुकी जेएमएम को महागठबंधन में लगह नहीं मिल सकी. वहीं झारखंड में आरजेडी कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार चला रही है. महागठबंधन में सीट न मिलने के चलते जेएमएम प्रमुख हेमंत सोरेन ने बिहार चुनाव लड़ने से अपना कदम पीछे खींच लिया है.
जेएमएम की क्या सियासी मजबूरी है?
एक तरफ जहां आरजेडी तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री का चेहरा बनाने पर अड़ा है वहीं कांग्रेस इसको लेकर अभी भी असमंजस की स्थिति मे दिख रही है. बताया जा रहा है कि वावमपंथी दल जैसे छोटे दल भी कांग्रेस के खिलाफ उम्मीदवार उतार सकते हैं. इससे गठबंधन के एकजुटता पर सवाल खड़ी हो सकती है. जेएमएम की डिमांड 12 सीटों की थी जो कि बाद में 4-6 सीटें मिलने की संभावना पर बात बनी, बाद में ये भी स्वीकार नहीं किया गया.
कांग्रेस ने बुधवार को अपनी पहली सूची जारी कर अपने 48 उम्मीदवारों के नाम घोषित किए थे. बताया जा रहा है कि एक दर्जन सीटों पर महागठबंधन के उम्मीदवार आमने- सामने है. जेएमएम भलो कह ले कि सियासी टकराव के बीच उनकी मांग दब गई लेकिन असल वजह झारखंड में चल रही हेमंत सरकार की मजबूरी भी मानी जा रही है.
झारखंड के सोरेन सरकार आरजेडी व कांग्रेस के बैसाखी पर टिकी हुई है. राज्य के कुल 81 विधानसभा सीटों में से जेएमएम के पास 30, कांग्रेस के पास 16 व आरजेडी के पास 4 व सीपीआई माले के पास 2 विधायकों के समर्थन से सरकार चल रही है. शंका जताई जा रही है कहीं सियासी मजबूरी के वजह से तो हेमंत सोरेन ने चुनाव लड़ने से अपना कदम पीछे खींच लिए हैं.
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