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रांची/डेस्क: अक्सर शराब पीने के बाद लोगों तरह-तरह की हरकतें करते है और अगले ही दिन वे भूल भी जाते हैं. ऐसे में कई लोग जब शराब पीते है तो अचानक उन्हें हिचकी आने लगती हैं. अक्सर यह स्थिति मजाक का विषय बन जाती है लेकिन इसके पीछे शरीर से जुड़ा एक साइंटिफिक कारण होता हैं. आइए जानते है..
डॉक्टरों के अनुसार, शराब पीने के दौरान या उसके बाद हिचकी आना शरीर की एक रिफ्लेक्स प्रकिया है, जो पेट, नसों और दिमाग के बीच होने वाली प्रतिक्रिया के कारण होती हैं. हिचकी एक रिफ्लेक्स के कारण होती है, जिसमें ब्रेनस्टेम, डायाफ्राम, फ्रेनिक नर्व और वेगस नर्व अहम भूमिका निभाते हैं. जब शराब शरीर में जाती है तो यह इन सभी सिस्टम पर असर डालती है, जिससे हिचकी आने की संभावना बढ़ जाती हैं.
तेजी से शराब पीने पर पेट फूलने लगता है?
जब कोई व्यक्ति बहुत तेजी से या ज्यादा मात्रा में शराब पीता है तो उसका पेट अचानक फूल जाता हैं. इससे पेट और डायाफ्राम के आसपास मौजूद वेगस नर्व पर दबाव पड़ता हैं. इसी दबाव के कारण हिचकी की प्रक्रिया शुरू हो जाती हैं.
शराब बढ़ाती है एसिडिटी और जलन
डॉक्टर बताते है कि शराब पेट के एसिड को बढ़ा देती है और भोजन नली और पेट की अंदरूनी परत को परेशान करती हैं. इससे जलन पैदा होती है और वही नसें सक्रिय हो जाती है, जो हिचकी से जुड़ी होती हैं. शराब लोअर इसोफेजियल स्फिंक्टर को भी ढीला कर देती हैं. यह मांसपेशी भोजन को पेट में रखने का काम करती हैं. जब यह ढीली हो जाती है तो पेट का एसिड ऊपर की ओर आने लगता है, जिससे हिचकी आने लगती हैं.
बीयर और फिजी ड्रिंक्स से ज्यादा आती है हिचकी
डॉक्टरों के मुताबिक, बीयर, स्पार्कलिंग वाइन और हार्ड सेल्टजर जैसी फिजी ड्रिंक्स से हिचकी आने की संभावना ज्यादा होती हैं. इन पेय पदार्थों में मौजूद बुलबुले पेट के अंदर फैल जाते है और नसों को ज्याद उत्तेजित करते हैं. यही कारण है कि बीयर पीने के बाद हिचकी ज्यादा देखने को मिलती हैं. व्हिस्की या वोडका जैसी तेज शराब अन्ननलिका में जलन पैदा कर सकती हैं. वहीं बहुत ठंडे पेय अचानक तापमान बदलते है, जिससे अन्ननलिका को झटका लगता है और हिचकी शुरू हो सकती हैं. इसलिए डॉक्टर धीरे-धीरे और सीमित मात्रा में शराब पीने की सलाह देते हैं.
खाली पेट शराब पीना और भी खतरनाक
अगर कोई व्यक्ति खाली पेट शराब पीता है तो इसका असर और तेज हो जाता हैं. शराब पेट की अंदरूनी परत को जल्दी नुकसान पहुंचाती है, एसिडिटी बढ़ाती है और एसिड को ऊपर आने से रोकने वाली मांसपेशियों को कमजोर कर देती हैं. इन सभी कारणों से हिचकी की संभावना बढ़ जाती हैं.
मसालेदार स्नैक्स भी बढ़ा सकती है परेशानी
शराब के साथ मसालेदार, खट्टे या तैलीय स्नैक्स खाने से हिचकी की समस्या और बढ़ सकती हैं. मसालेदार भोजन में मौजूद कैप्साइसिन नसों को उत्तेजित करता है जबकि खट्टे खाद्य पदार्थ एसिड रिफ्लेक्स बढ़ाते हैं. वसायुक्त भोजन पाचन को धीमा कर देता है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है और वेगस नर्व पर दबाव बना रहता हैं. आमतौर पर हिचकी कुछ समय बाद अपने आप ठीक हो जाती है लेकिन अगर हिचकी 48 घंटे से ज्यादा तक जारी रहती है तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. डॉक्टरों के मुताबिक, लंबे समय तक हिचकी आना दिमाग या नसों से जुड़ी समस्या का संकेत भी हो सकता हैं.
इन लक्षणों के साथ आए हिचकी तो तुरंत डॉक्टर से मिलें
अगर हिचकी की वजह से आपकी नींद, खाने-पीने की आदत या रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें. इसके साथ अगर वजन कम हो रहा हो, नसों से जुड़ी दिक्कतें हो रही हो या सीने में लगातार जलन हो तो यह गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता हैं.