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रामनगर/डेस्क: पश्चिमी चम्पारण के रामनगर-शिवपुर कौलिनी मुख्य पथ पर ब्लोर नदी पर बना 20 वर्ष पुराना पुल अब अपनी आखिरी सांसें ले रहा है. 2017 के बाढ़ के बाद क्षतिग्रस्त पुल अब दम तोड़ने पर मजबूर है. पुल के दो पायों का दृश्य देखकर ही राहगीरों की रूह कांप जाती है. लोग अपनी जान हथेली पर रखकर पुल पार करते हैं. पुल के समीप एक किलोमीटर दूरी पर स्थित है पंचायत का एक उच्च विद्यालय. इसी जर्जर पुल को पार करके बच्चे स्कूल जाते हैं. जल संसाधन विभाग ने वर्षों पहले ही इस पुल पर क्षतिग्रस्त का ठप्पा लगा दिया था. भारी वाहनों को ना ले जाने की चेतावनी भी जारी कर दी थी, लेकिन किसानों की मजबूरी है, उन्हें अपना काम करने के लिए तो इस पुल से जाना ही पड़ता है, अब सोचिए, जिस पुल को पार करते समय बाइक सवाल भी डरते हैं, उसी पुल पर से मजबूर किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली पर गन्ना लादकर पार करके हैं. भारी वाहन पार करते समय पुल के टूटने जैसी आवाज आती है. पुल के पायों की दरार देखने के बाद लोग कहते हैं कि लोग तो भगवान भरोसे ही पुल को पार करते होंगे.
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