न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
अश्मित सिन्हा ( संवाददाता ) / पटना - बिहार की राजनीति में संगठनात्मक स्तर पर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विधानसभा और विधान परिषद दोनों सदनों में पार्टी की रणनीतिक पकड़ मजबूत करने के उद्देश्य से नई जिम्मेदारियों का ऐलान किया है। इसके लिए विधानसभा अध्यक्ष और विधान परिषद सभापति को आधिकारिक पत्र भेजकर विभिन्न नेताओं की नियुक्तियों की जानकारी दी गई है। माना जा रहा है कि आगामी सत्रों और राजनीतिक गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है, ताकि सदन के भीतर सरकार की समन्वय क्षमता और अनुशासन को और मजबूत किया जा सके। राजनीतिक हलकों में इसे सत्ता और संगठन के बीच बेहतर तालमेल की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
हाईलाइट्स -
- विधानसभा और विधान परिषद में कई नेताओं को नई जिम्मेदारी
- संजीव चौरसिया बने विधानसभा के मुख्य सचेतक
- विधान परिषद में संजय कुमार सिंह को मिली बड़ी भूमिका
- सम्राट चौधरी ने दोनों सदनों के प्रमुखों को भेजा आधिकारिक पत्र
- आगामी सत्रों से पहले संगठनात्मक मजबूती पर सरकार का फोकस
विधानसभा में संजीव चौरसिया को बड़ी जिम्मेदारी
बिहार विधानसभा में भाजपा विधायक संजीव चौरसिया को मुख्य सचेतक बनाया गया है। वहीं मनजीत कुमार सिंह को उप मुख्य सचेतक की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा कई विधायकों को सचेतक के रूप में नियुक्त किया गया है, जिनमें गायत्री देवी, राजू तिवारी, रामविलास कामत, सुधांशु शेखर, राणा रणधीर, ललित नारायण मंडल, कृष्ण कुमार ऋषि, अरुण मांझी और रत्नेश कुमार शामिल हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सचेतकों की भूमिका सदन की कार्यवाही में काफी अहम होती है। ये नेता विधायकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने, पार्टी लाइन के अनुसार मतदान कराने और महत्वपूर्ण मुद्दों पर समन्वय बनाने का काम करते हैं। ऐसे में इन नियुक्तियों को आगामी राजनीतिक रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
विधान परिषद में भी नई टीम तैयार
विधान परिषद में भी कई नेताओं को नई जिम्मेदारियां देकर संगठनात्मक ढांचे को मजबूत किया गया है। ललन कुमार सराफ और राजेंद्र प्रसाद गुप्ता को उप नेता नियुक्त किया गया है, जबकि संजय कुमार सिंह को मुख्य सचेतक बनाया गया है। जनक राम को उप मुख्य सचेतक की जिम्मेदारी मिली है। वहीं नीरज कुमार और रीना देवी को सचेतक बनाया गया है। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इन सभी नियुक्तियों को लेकर औपचारिक सूचना भेज दी गई है। माना जा रहा है कि सरकार आगामी विधानसभा और परिषद सत्रों में किसी तरह की राजनीतिक असहजता से बचना चाहती है और इसी वजह से सदन के भीतर एक मजबूत और सक्रिय टीम तैयार की गई है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह बदलाव आने वाले समय में बिहार की सत्ता राजनीति में अहम भूमिका निभा सकता है।
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