झारखंड शराब घोटाला: नियम के विरुद्ध दिशिता वेंचर्स को मिला था टेंडर, सरकार को 44...

झारखंड शराब घोटाला

झारखंड शराब घोटाला: नियम के विरुद्ध दिशिता वेंचर्स को मिला था टेंडर, सरकार को 448 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान !

फर्जी दस्तावेजों से शुरू हुई जांच, अब बड़े नेटवर्क की तलाश में एजेंसी

झारखंड शराब घोटाला नियम के विरुद्ध दिशिता वेंचर्स को मिला था टेंडर सरकार को 448 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान

न्यूज़11 भारत 
रांची/डेस्क:
झारखंड में कथित शराब घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए खुलासे सामने आ रहे हैं. ACB की जांच में अब तक मिले तथ्यों के आधार पर यह आशंका जताई जा रही है कि झारखंड स्टेट बेवरेजेस कॉरपोरेशन लिमिटेड (JSBCL) के माध्यम से सरकारी खजाने को करीब 448 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया गया. मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एजेंसी अब इस पूरे कथित सिंडिकेट और उससे जुड़े प्रभावशाली लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है.

बैंक गारंटी की जांच ने खोले कई राज
मामले की शुरुआत वर्ष 2023 में हुई, जब JSBCL ने राज्य की खुदरा शराब दुकानों में मैनपावर उपलब्ध कराने का जिम्मा दो निजी एजेंसियों, मैसर्स विजन हॉस्पिटलिटी और मैसर्स मार्शन इनोवेटिव को सौंपा था. बाद में नियमों के उल्लंघन के आरोप सामने आने पर इन एजेंसियों की बैंक गारंटी को भुनाने की प्रक्रिया शुरू की गई. जांच के दौरान अधिकारियों को पता चला कि संबंधित एजेंसियों द्वारा जमा कराई गई बैंक गारंटियां कथित तौर पर फर्जी थीं. इसी खुलासे ने पूरे मामले को नया मोड़ दिया और व्यापक स्तर पर अनियमितताओं की जांच शुरू हुई.

टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर उठे सवाल
एसीबी की जांच में यह भी सामने आया है कि मामला केवल फर्जी बैंक गारंटी तक सीमित नहीं था. शराब की थोक आपूर्ति के लिए जारी टेंडरों में भी नियमों के उल्लंघन के आरोप सामने आए हैं. उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, किसी भी कंपनी को टेंडर के लिए पात्र होने हेतु तीन वर्षों के सेल्स टैक्स, प्रोफेशनल टैक्स या वैट रिटर्न से संबंधित प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना आवश्यक था. जांच में दावा किया गया है कि मैसर्स दिशिता वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड ने निर्धारित अवधि के बजाय केवल दो वर्षों के दस्तावेज जमा किए थे.

अधिकारियों और कंपनी के बीच मिलीभगत की आशंका
जांच एजेंसी के अनुसार, आवश्यक दस्तावेजों की कमी के बावजूद कंपनी को थोक आपूर्ति का लाइसेंस प्रदान कर दिया गया. एसीबी की केस डायरी में यह संदेह व्यक्त किया गया है कि टेंडर प्रक्रिया में कुछ अधिकारियों और कंपनी के बीच मिलीभगत हो सकती है. जांच में यह भी सामने आया है कि राज्य में शराब के थोक कारोबार पर नियंत्रण स्थापित करने के उद्देश्य से एक संगठित नेटवर्क सक्रिय था, जिसने विभिन्न स्तरों पर प्रभाव डालकर व्यवस्था को प्रभावित किया.

सप्लाई में देरी से सरकार को हुआ भारी नुकसान
मामले से जुड़े गवाहों के बयानों के आधार पर जांच एजेंसी यह भी जांच रही है कि कुछ कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए शराब आपूर्ति की प्रक्रिया को जानबूझकर प्रभावित किया गया था. आरोप है कि दिशिता वेंचर्स और ओम साईं बेवरेजेस जैसी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए लोकप्रिय ब्रांडों की विदेशी और देशी शराब की सप्लाई धीमी कर दी गई. बताया जा रहा है कि बाजार में मांग अधिक होने के बावजूद समय पर पर्याप्त आपूर्ति नहीं की गई. इसके कारण बिक्री प्रभावित हुई और राज्य सरकार को राजस्व के रूप में भारी नुकसान उठाना पड़ा. एसीबी के अनुसार, प्रारंभिक जांच में इस नुकसान का आंकड़ा करीब 448 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है.

जांच के दायरे में कई अहम किरदार
एसीबी अब इस पूरे मामले में शामिल संभावित लाभार्थियों, अधिकारियों और कारोबारी समूहों की भूमिका की गहन जांच कर रही है. एजेंसी का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल इस कथित घोटाले से जुड़े दस्तावेजों, वित्तीय लेनदेन और टेंडर प्रक्रिया की बारीकी से समीक्षा की जा रही है.

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