मुमताज अहमद/न्यूज11 भारत
खलारी/डेस्क: रमजान के पाक महीने का आखिरी अशरा चल रहा है.ऐसे मे मुस्लिम समुदाय के लोग पवित्र रमजान महीने में रोजा, नमाज,कुरान पाक की तिलावत व नमाजे तरावीह के माध्यम से इबादत में लगे हुए हैं.ऐसे मे बचरा का अली हैदर मात्र 8 वर्ष की उम्र में पूरे रोजे मुकम्मल करने की और बढ़ रहे हैं.अली हैदर ने रविवार को रमजान महीने का 25वां रोजा रखा.इस वर्ष अभी तक उन्होंने एक भी रोजा नहीं छोड़ा है.इसके साथ ही उन्होने पांच वक्त के नमाज भी पढ़ रहे है,जबकि 12 रमजान को ही उन्होने मुकम्मल तरावीह पढ़ ली है.अली हैदर के पिता कुदूस खान मूलरुप से ग्राम पातकोय प्रखंड बुड़मू जिला रांची का निवासी है और वर्तमान मे बचरा बसंत विहार कॉलोनी में रहते हैं.उनका बचरा चार नम्बर चौक मे फल दुकान भी है.अली हैदर का दो बड़ा भाई और एक बहन है.भाई एंव बहनो मे अली हैदर सबसे छोटा है.अली हैदर डीएवी पब्लिक स्कूल बचरा में कक्षा द्वितीय का छात्र है.रविवार को उन्होने लगातार 25वां रोजा मुकम्मल कर सबका दिल जीत लिया.अली हैदर के इस खास कदम से परिवार में खुशी का माहौल है.अली हैदर के पिता कुदूस खान समेत परिवार के अन्य सदस्यों ने नन्हे रोजेदार अली हैदर की जमकर प्रशंसा कर रहे हैं.परिवार के लोगों ने बताया कि छोटी सी उम्र में अली हैदर ने पूरे उत्साह और लगन के साथ अपना रोजा पूरे एहतराम के साथ रख रहे हैं.
परिवार के सदस्यों ने बताया कि रमजान की शुरुआत में उन्हें रोजा नहीं रखने की सलाह दी गई. परिवार के लोगों ने उन्हें रोजा रखने से मना भी किया,लेकिन उन्होंने किसी की बात नहीं सुना और बुलंद इरादे के साथ रोजा रख रहे है. इधर अली हैदर ने कहा कि पवित्र महीना रमजान में पूरा रोजा रखना, नमाज अदा करना व तरावीह की नमाज मुक्कमल करना काफी अच्छा लग रहा है.उन्होंने कहा कि खुदा की इबादत करने से खुदा लोगों की गुनाहों को माफ करता है. ऐसे में उन्होने क्षेत्र के सभी लोगों से भी रमजान महीने में पूरा रोजा रखने, नमाज पढ़ने,तरावीह पढ़ने के अलावा गरीब लोगों की मदद करने की उन्होंने अपील की है.इधर रमजान मे बचे हुए कुल पांच रोजा ओर रखने के बाद अली हैदर 8 वर्ष की उम्र में पूरा रोजा रखने वाला नन्हा बालक बन जाएगा.उनके पिता कुदूस खान,चाचा खुर्शीद खान,भाई मासूम खान व मिस्बाह खान सहित घर के अन्य सदस्यों ने अली हैदर को बधाई देते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य और नेक राह पर चलने की दुआ भी की.मात्र 8 वर्ष की उम्र में पूरा रोजा रखने की उत्साह पर चल रहे अली हैदर अन्य बच्चों के अलावा वैसे लोग जो रोजा नहीं रख पाते हैं उनके लिए प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं.
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