राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर सख्त हुई UP सरकार, कथित सात करोड़ रुपये की अनियमितता क...

राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर सख्त हुई UP सरकार, कथित सात करोड़ रुपये की अनियमितता की जांच के लिए SIT पहुंची अयोध्या

दानपात्र से धन हेराफेरी के आरोपों ने बढ़ाई चिंता, 15 दिन में रिपोर्ट देगी SIT टीम

राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर सख्त हुई up सरकार कथित सात करोड़ रुपये की अनियमितता की जांच के लिए sit पहुंची अयोध्या 

न्यूज़11 भारत
अयोध्या/डेस्क:
अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान और चढ़ावे को लेकर उठे विवाद ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है. मंदिर में कथित तौर पर करोड़ों रुपये के चढ़ावे में अनियमितताओं और धन गबन के आरोप सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले की जांच के लिए SIT का गठन कर दिया है. CM योगी ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के निर्देश देते हुए अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई करने को कहा है. UP सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय SIT की अध्यक्षता लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत करेंगे. टीम में आईजी रेंज किरन एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को भी शामिल किया गया है. SIT  को सात दिन के अंदर प्रारंभिक रिपोर्ट और 15 दिन के भीतर अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है.

क्या है पूरा मामला ? 
राम मंदिर के दानपात्रों से कथित रूप से करीब सात करोड़ रुपये की चोरी और गबन की चर्चाएं बीते दिनों सुर्खियों में रहीं. आरोप है कि मंदिर में तैनात कुछ कर्मचारियों ने दान राशि में हेराफेरी की. मामले के सामने आने के बाद पुलिस और प्रशासन ने कई संदिग्धों से पूछताछ शुरू की. हालांकि, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने 13 जून को जारी बयान में दानपात्र से चोरी की खबरों को अफवाह करार दिया था. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने खुद मुख्यमंत्री योगी से पूरे मामले की जांच कराने का अनुरोध किया था, जिसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की पड़ताल के लिए SIT गठन का निर्णय लिया.

आरोपी कर्मी के घर छापेमारी, लाखों रुपये बरामद
जांच के दौरान रुदौली क्षेत्र के मीनापुर ठकुरन फगौली गांव में छापेमारी की गई, जहां से 10 से 12 लाख रुपये नकद बरामद होने की जानकारी सामने आई. यह कार्रवाई ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और स्थानीय प्रशासन की मौजूदगी में की गई. बरामदगी मंदिर के पूर्व कर्मी रहे 27 वर्षीय लवकुश मिश्रा के घर से होने की बात कही जा रही है. लवकुश पर दानपात्र के चढ़ावे से जुड़े धन के गबन का आरोप है. जांच एजेंसियां बरामद नकदी और उसके स्रोत की पड़ताल कर रही हैं.

परिवार ने आरोपों से किया किनारा
वहीँ, लवकुश मिश्रा के पिता बच्चूलाल ने दावा किया कि उन्हें बरामद धनराशि के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. उनके अनुसार, वह लंबे समय से गाजियाबाद में रह रहे थे और जिस समय कार्रवाई हुई, ट्रस्ट से जुड़े कुछ लोग उनके घर पहुंचे तथा नकदी अपने साथ ले गए. उन्होंने यह भी कहा कि फैजाबाद में जिस मकान के निर्माण को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, उसका उनके बेटे से कोई संबंध नहीं है. बच्चूलाल का कहना है कि मकान निर्माण के लिए उन्होंने अपनी 10 से 12 बीघा कृषि भूमि गिरवी रखी है और उसी पैसे से निर्माण कार्य कराया जा रहा है.

मंदिर में नौकरी के बाद बदली आर्थिक स्थिति पर उठे सवाल
 स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, लवकुश मिश्रा पहले कार मिस्त्री का काम करता था. राम राम मंदिर में नौकरी मिलने के बाद उसकी आर्थिक स्थिति में तेजी से सुधार देखा गया. गांव में यह भी चर्चा रही है कि कुछ कैश कथित रूप से घर के आसपास छिपाकर रखा गया था, जिसे बाद में बरामद कर लिया गया. हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है. SIT की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पुरे मामले का खुलासा हो पायेगा.

राजनीतिक बयानबाजी से भी गरमाया मामला
वहीँ, चढ़ावे को लेकर सामने आ रही गड़बड़ियां और अनियमितताओं को लेकर विपक्ष ने भी ट्रस्ट पर सवाल उठाए हैं. समाजवादी पार्टी अध्यक्ष और उत्तर प्रद्देश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मामले को गंभीर बताते हुए पारदर्शी जांच की मांग की. उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर प्रबंधन से जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए. वहीं, राम मंदिर आंदोलन से जुड़े वरिष्ठ BJP नेता विनय कटियार ने भी कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए. उनका कहना था कि निष्पक्ष जांच के बाद पूरे मामले की सच्चाई सामने आ जाएगी.

CCTV रिकॉर्ड, दान गणना प्रक्रिया और कर्मचारियों की भूमिका जांच के दायरे में
SIT अब दानपात्रों से प्राप्त राशि की गिनती प्रक्रिया, CCTV फुटेज, निगरानी व्यवस्था में संभावित छेड़छाड़ और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की विस्तृत जांच करेगी. जांच रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि दान राशि में वास्तव में कोई गड़बड़ी हुई थी या नहीं. फिलहाल पूरे मामले पर प्रदेश सरकार की नजर बनी हुई है और श्रद्धालुओं के विश्वास से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे में जांच एजेंसियां हर पहलू की बारीकी से पड़ताल कर रही हैं.

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