अरब सागर में परमाणु पनडुब्बी की तैनाती, मिडिल ईस्ट तनाव में ब्रिटेन की बढ़ती भूमिका

अरब सागर में परमाणु पनडुब्बी की तैनाती, मिडिल ईस्ट तनाव में ब्रिटेन की बढ़ती भूमिका

अरब सागर में परमाणु पनडुब्बी की तैनाती मिडिल ईस्ट तनाव में ब्रिटेन की बढ़ती भूमिका

न्यूज़11 भारत
रांची/डेस्क:
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष अब और व्यापक रूप लेता दिख रहा हैं. बीते कई हफ्तों से जारी हमलों के बीच अब ब्रिटेन भी खुलकर सक्रिय होता नजर आ रहा हैं. हालात ऐसे बनते दिख रहे है कि यह टकराव क्षेत्रीय सीमाओं से बाहर निकलकर वैश्विक असर डाल सकता हैं.

ब्रिटेन ने अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाते हुए अरब सागर में अपनी उन्नत परमाणु संचालित पनडुब्बी HMS Anson को तैनात कर दिया हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह पनडुब्बी टॉमहॉक ब्लॉक IV क्रूज मिसाइलों से लैस है, जो लंबी दूरी तक सटीक हमले करने में सक्षम हैं. इस कदम को क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा हैं.

अमेरिका को सैन्य बेस इस्तेमाल की अनुमति
ब्रिटेन ने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए अमेरिका को अपने सैन्य ठिकानों के उपयोग की अनुमति दे दी हैं. इसका सीधा मतलब यह है कि ईरान के खिलाफ संभावित कार्रवाई में अमेरिकी सेना अब ब्रिटिश बेस का सहारा ले सकती हैं. खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों पर हो रहे हमलों के जवाब में यह कदम अहम माना जा रहा हैं.

इसी बीच संयुक्त अरब अमीरात के तट के पास एक कमर्शियल जहाज पर हमले की खबर सामने आई हैं. ब्रिटेन की मैरीटाइम अथॉरिटी के अनुसार, शारजाह के उत्तर में करीब 15 नॉटिकल मील दूरी पर एक बल्क कैरियर के पास विस्फोट हुआ. जहाज के कप्तान ने बताया कि किसी अज्ञात प्रोजेक्टाइल के कारण धमाका हुआ, हालांकि सभी क्रू सदस्य सुरक्षित हैं. इस घटना ने समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ा दी हैं.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना तनाव का केंद्र
दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर हालात बेहद संवेदनशील हो गए हैं. इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया हैं. उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज को सुरक्षित तरीके से नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट्स को निशाना बना सकता हैं. अमेरिका की इस चेतावनी के जवाब में ईरान ने भी सख्त रुख अपनाया हैं. ईरानी सशस्त्र बलों के संयुक्त कमांड ने कहा है कि यदि उनके ऊर्जा ढांचे पर हमला हुआ, तो क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ऊर्जा ठिकानों को भी निशाना बनाया जाएगा.

लंबी दूरी की मिसाइलों का इस्तेमाल
तनाव को और बढ़ाते हुए इजरायली अधिकारियों ने दावा किया है कि ईरान ने पहली बार लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, करीब 4000 किलोमीटर रेंज की मिसाइलें दागी गई, जिससे मिडिल ईस्ट से बाहर भी खतरे की आशंका बढ़ गई हैं. इजरायली सेना का कहना है कि इन मिसाइलों का निशाना हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया सैन्य बेस था, जहां अमेरिकी और ब्रिटिश सेना की मौजूदगी हैं. हालांकि ईरान ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि उस हमले में उसका कोई हाथ नहीं हैं. 

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