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देश की पांचवीं सबसे बड़ी पार्टी बनी NCPI! 0 से 20 सांसदों वाली बनी पार्टी NDA का करेगी समर्थन, संसद में दिखेगा अलग नजारा

देश की पांचवीं सबसे बड़ी पार्टी बनी ncpi 0 से 20 सांसदों वाली बनी पार्टी nda का करेगी समर्थन संसद में दिखेगा अलग नजारा

न्यूज11  भारत

रांची/डेस्क: त्रिपुरा की एक पार्टी NCPI कल तक जो गुननाम सी थी, आज उसकी पूरे देश में चर्चा हो रही है. क्योंकि जिस पार्टी का अब तक कोई सांसद नहीं था, लेकिन अब उसको बैठे-बिठाए 20 सांसद मिल गये हैं. इतना ही नहीं, सांसदों की ताकत के हिसाब से आकलन करें तो यह देश की पांचवीं सबसे बड़ी पार्टी बन गई है. पश्चिम बंगाल का विधानसभा चुनाव हारने के बाद ममता बनर्जी की पार्टी में कोहराम मचा हुआ है. इस कोहराम में टीएमसी के 20 सांसदों ने अलग होकर त्रिपुरा की नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी NCPI में विलय का ऐलान कर दिया. इस विलय के बाद ही एनसीपीआई देश की सबसे बड़ी पार्टी बन गयी है.

विलय के बाद देश की 10 सबसे बड़ी पार्टियां

1  बीजेपी 240
2  कांग्रेस 99
3  समाजवादी पार्टी 37
4  डीएमके 22
5  एनसीपीआई 20
6  टीडीपी 16
7  जेडीयू 12
8  टीएमसी 09
9  शिवसेना-यूटीबी 09
10  एनसीपी-शरद 08

'टीएमसी के बागी सांसदों का पहले बीजेपी में विलय की अटकलें चल रही थीं. लेकिन बागी सांसदों ने बहुत ही सोच-समझ कर और बड़ा दांव खेलते हुए एक ऐसी पार्टी में विलय करने का फैसला किया जो अस्तित्व में तो है, भले ही वह गुमनाम क्यों न हो. बागी सांसदों ने नई पार्टी बनाने के झंझट से मुक्त रखते हुए यह फैसला किया है. इस विलय के बाद भी यह पार्टी एनडीए को समर्थन देगी यह एनडीए के लिए सबसे बड़ी राहत की बात है.

मानसून सत्र में दिखेगा अलग नजारा

आगामी मानसून सत्र जब शुरू होगा तब संसद का नजारा अलग ही होगा, क्योंकि टीएमसी के बागी सांसद अपनी पूर्व पार्टी के खेमे में नजर नहीं आएंगे. बता दें कि एनसीपीआई में विलय से पहले सभी बागी सांसद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मिल चुके हैं और उन्होंने पत्र देकर स्पीकर से अनुरोध किया कि सदन में उनके अलग बैठने की व्यवस्था की जाए. यह व्यवस्था सिर्फ बैठने तक ही  सीमित नहीं होगी, क्योंकि एनडीए सरकार आगामी संसद सत्रों में जब भी कोई बिल लाएगी तब उसकी ताकत बढ़ी ही नजर आएगी और बिलों को पास कराना अब और भी आसान हो जाएगा. यह भी बता दें कि एनडीए सरकार का अगला लक्ष्य परिसीमन बिल को संसद से पास कराना है. हालांकि एनडीए के पास इस समय दो तिहाई संख्या बल नहीं है, लेकिन इन सांसदों के बल पर और डीएमके के सांसदों के भरोसे इस लक्ष्य की ओर थोड़ा और नजदीक पहुंच सकती है. वैसे अभी इस सम्बंध में डीएसके से अभी बात नहीं है, लेकिन एनडीए समर्थन मिलने का भरोसा जरूर कर रही है.

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