बिहार की नई सरकार में शराबबंदी पर रार! शपथ के तुरंत बाद अपनी ही सरकार के विधायक ने उठाई समीक्षा की मांग
न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क: बिहार में सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली नई सरकार के गठन के साथ ही राज्य का सबसे चर्चित और विवादित मुद्दा 'शराबबंदी' एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस बार विपक्ष नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष के ही एक प्रमुख विधायक ने शराबबंदी कानून को खत्म करने या इसकी विस्तृत समीक्षा करने की मांग उठाकर सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर दी है।
बिहार को अब शराबबंदी की जरूरत नहीं- विधायक माधव आनंद
बुधवार (15 अप्रैल, 2026) को राजभवन में शपथ ग्रहण समारोह से लौटते समय राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के विधायक माधव आनंद ने मीडिया से बातचीत में बड़ा बयान दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह आज भी अपनी पुरानी मांग पर कायम हैं और उनका मानना है कि अब वक्त आ गया है जब इस कानून की गंभीरता से समीक्षा होनी चाहिए। माधव आनंद के अनुसार, "व्यक्तिगत तौर पर मेरी राय है कि बिहार में अब शराबबंदी की कोई आवश्यकता नहीं है।"
नई सरकार से जगी 'समीक्षा' की उम्मीद
माधव आनंद ने भरोसा जताया कि चूंकि अब प्रदेश में नई सरकार का गठन हुआ है, इसलिए मुख्यमंत्री इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाएंगे। उन्होंने कहा, "यह अपनी सरकार है, और मुझे पूरा विश्वास है कि जनहित को ध्यान में रखते हुए शराबबंदी कानून के हर पहलू पर दोबारा विचार किया जाएगा।" गौरतलब है कि बजट सत्र के दौरान भी माधव आनंद ने सदन के भीतर नीतीश कुमार की मौजूदगी में इस कानून पर सवाल खड़े किए थे।
जीतन राम मांझी और कुशवाहा भी रहे हैं मुखर
शराबबंदी की समीक्षा की मांग सिर्फ माधव आनंद तक सीमित नहीं है। एनडीए गठबंधन के अन्य वरिष्ठ नेता भी समय-समय पर इसके खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कई बार इस कानून के क्रियान्वयन पर सवाल उठाए हैं। उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के नेताओं का भी मानना है कि शराबबंदी के कारण बिहार को राजस्व का नुकसान हो रहा है और जमीनी स्तर पर इसकी विफलता से भ्रष्टाचार बढ़ रहा है।
ऐतिहासिक फैसला रहेगा जारी- मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी
एक तरफ जहाँ सहयोगी दल समीक्षा की मांग कर रहे हैं, वहीं मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का रुख बिल्कुल स्पष्ट है। उन्होंने पदभार संभालने से पहले ही साफ कर दिया था कि बिहार में शराबबंदी कानून हर हाल में लागू रहेगा। सम्राट चौधरी सार्वजनिक मंचों से इसे नीतीश कुमार के जीवन का "सबसे ऐतिहासिक और क्रांतिकारी फैसला" बता चुके हैं।
सियासी गलियारों में चर्चा तेज
सत्ता पक्ष के विधायक के इस ताज़ा बयान ने विपक्ष को सरकार घेरने का नया मौका दे दिया है। अब देखना यह होगा कि सम्राट चौधरी अपनी सरकार के भीतर उठ रही इन विरोधी आवाजों को कैसे शांत करते हैं और क्या वाकई भविष्य में इस 'ऐतिहासिक कानून' में कोई ढील दी जाएगी या नहीं।