विभागीय जांच में बरी, अब आपराधिक केस भी रद्द, हाईकोर्ट से सचिदानंद को बड़ी राहत

विभागीय जांच में बरी, अब आपराधिक केस भी रद्द, हाईकोर्ट से सचिदानंद को बड़ी राहत

झारखंड हाईकोर्ट ने कोलाबिरा लैम्प्स से जुड़े मामले में सचिदानंद प्रसाद के खिलाफ चल रहे आपराधिक केस को रद्द कर दिया है.

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न्यूज़11 भारत 
रांची/डेस्क:
झारखंड हाईकोर्ट ने कोलाबिरा लैम्प्स से जुड़े मामले में सचिदानंद प्रसाद के खिलाफ चल रहे आपराधिक केस को रद्द कर दिया है. न्यायाधीश राजेश शंकर की अदालत ने सरायकेला के सीजेएम द्वारा 29 सितंबर 2022 को लिए गए संज्ञान और 28 जनवरी 2023 को जारी समन के आदेश को भी रद्द कर दिया. मामला कोलाबिरा LAMPS में वर्ष 2009-10 से 2014-15 के दौरान करीब 2.06 करोड़ रुपये के गबन और राशि के दुरुपयोग के आरोप से जुड़ा था. जांच के बाद सचिदानंद प्रसाद समेत अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था. याचिकाकर्ता से 2,20,672 रुपये की राशि वसूली योग्य बताई गई थी.

सचिदानंद प्रसाद पर तीन मुख्य आरोप थे. इनमें सोसाइटी के खाते से 30 हजार रुपये निकालने के बाद कैश रजिस्टर में उसका उल्लेख नहीं करना, स्टॉक की बिक्री से मिले 41,500 रुपये अपने खाते में जमा करना और 42,057 रुपये खाद खरीदने के लिए निकालने के बाद उसकी खरीद-बिक्री का सही हिसाब नहीं देने का आरोप शामिल था. इन्हीं आरोपों को लेकर सहकारिता विभाग में भी Surcharge Case चला था. इस मामले में संयुक्त रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां ने 16 फरवरी 2019 को सचिदानंद प्रसाद को सभी आरोपों से बरी कर दिया था. जांच में यह पाया गया था कि संबंधित लेन-देन की जानकारी कैश रजिस्टर में दर्ज थी.

हाईकोर्ट ने कहा कि विभागीय मामले और आपराधिक केस में लगाए गए आरोप एक ही हैं. विभागीय मामले में जब उन्हें मेरिट के आधार पर बरी किया जा चुका है और कैश रजिस्टर में संबंधित लेन-देन की प्रविष्टियां भी मौजूद हैं, तो उसी आधार पर आपराधिक केस को आगे चलाना उचित नहीं है.अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के कई पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि यदि विभागीय और आपराधिक मामले में आरोप समान हों और विभागीय मामले में व्यक्ति को मेरिट पर दोषमुक्त किया गया हो, तो आपराधिक कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग हो सकता है. इसी आधार पर हाईकोर्ट ने सचिदानंद प्रसाद के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया और उनकी याचिका मंजूर कर ली.

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