अब बिहार बनेगा मछली पालन का नया हब, इस जिले में खुलेगा नेशनल फिशरीज डेवलपमेंट बोर्ड का रीजनल ऑफिस
न्यूज 11 भारत / पटना डेस्क:
बिहार के मत्स्य पालकों के लिए तरक्की का नया द्वार खुलने जा रहा है। अब आधुनिक तकनीक, उन्नत बीज और सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भरता खत्म होगी। राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB) ने बिहार में अपना क्षेत्रीय कार्यालय खोलने का बड़ा फैसला लिया है। इसके लिए सारण जिले के नंदलाल छपरा में 5.68 एकड़ जमीन का चयन किया गया है। यह केंद्र पूरे पूर्वी भारत के लिए मछली पालन का सबसे बड़ा 'नॉलेज और ट्रेनिंग हब' बनेगा।
अप्रैल से पटना में अस्थायी दफ्तर, सारण में बनेगा परमानेंट सेंटर
दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठक के अनुसार, जब तक सारण के नंदलाल छपरा में मुख्य भवन तैयार नहीं हो जाता, तब तक इसका अस्थायी कार्यालय पटना के 'मत्स्य विकास भवन' से संचालित होगा। अप्रैल के आखिरी हफ्ते से यहाँ कामकाज शुरू होने की उम्मीद है। विभाग के सचिव कपिल अशोक के मुताबिक, इस केंद्र के जरिए 'प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना' की सीधी मॉनिटरिंग होगी, जिससे सब्सिडी का पैसा बिना किसी देरी के सीधे किसानों के बैंक खातों में पहुँच सकेगा।
लैब की तकनीक अब सीधे पहुंचेगी तालाबों तक
बिहार में मछली की मांग और पैदावार के बीच के अंतर को कम करने के लिए यह सेंटर 'टेक्नोलॉजी ट्रांसफर' पर काम करेगा। बायोफ्लॉक जैसी महंगी और आधुनिक तकनीकों को अब गांवों के साधारण तालाबों तक पहुँचाया जाएगा। राज्य के विशाल 'चौर' (दलदली) क्षेत्रों को वैज्ञानिक तरीके से विकसित किया जाएगा। अब मछली पालकों को क्वालिटी बीज और फिश फीड (दाना) के लिए भटकना नहीं होगा, जिससे उनकी लागत घटेगी और मुनाफा दोगुना होगा।
पूर्वी भारत का बड़ा गेटवे बनेगा बिहार
यह क्षेत्रीय कार्यालय सिर्फ बिहार के लिए ही नहीं, बल्कि झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के किसानों व अधिकारियों के लिए भी मुख्य प्रशिक्षण केंद्र होगा। इस पहल से बिहार न केवल मछली उत्पादन में आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि यह पूर्वोत्तर भारत के राज्यों के लिए मछली व्यापार का एक प्रमुख केंद्र (Gateway) बनकर उभरेगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के हजारों नए अवसर पैदा होंगे।