LPG Crisis: मोहनिया में ट्रैफ़िक पुलिस की दादागिरी या गैस एजेंसी की मनमानी? सिलेंडर नहीं दिया तो काट दिया चालान
न्यूज 11 भारत / पटना डेस्क: कैमूर जिले के मोहनिया स्थित चांदनी चौक पर बुधवार का नजारा काफी हंगामेदार रहा। एक ओर जहां एलपीजी सिलेंडर की किल्लत के चलते ग्राहकों की लंबी कतारें लगी थीं, वहीं दूसरी ओर इंडेन गैस एजेंसी की गाड़ियों के चालान काटने को लेकर एजेंसी कर्मियों और ट्रैफिक पुलिस के बीच विवाद छिड़ गया। इस विवाद ने देखते ही देखते उग्र रूप ले लिया, जिसके कारण सड़क के बीचों-बीच गाड़ियां खड़ी कर दी गईं और आवागमन पूरी तरह ठप हो गया।
सिलेंडर न देने पर काटा चालान
गैस एजेंसी के कर्मचारियों ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एजेंसी के स्टाफ का आरोप है कि ट्रैफिक पुलिस के जवान उनसे अवैध तरीके से गैस सिलेंडर की मांग कर रहे थे। कर्मियों का कहना है कि जब उन्होंने नियमों का हवाला देते हुए बिना कनेक्शन के सिलेंडर देने से मना किया, तो पुलिस ने बदले की भावना से उनकी गाड़ियों का चालान काट दिया। यह विवाद केवल एक बार का नहीं है, बल्कि एजेंसी मैनेजर राम शंकर झा के अनुसार, मंगलवार से ही इस तरह की परेशानियां शुरू हो गई थीं। मैनेजर ने पुलिस पर बदतमीजी करने और दस्तावेजों को अनदेखा करने का भी आरोप लगाया है।
क्या बोले ट्रैफिक अधिकारी?
इन तमाम आरोपों को ट्रैफिक पुलिस ने पूरी तरह सिरे से खारिज कर दिया है। सब इंस्पेक्टर संतोष कुमार ने स्पष्ट किया कि उनकी कार्रवाई का गैस एजेंसी से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा, "हम रोजाना की तरह वाहनों की सामान्य चेकिंग कर रहे थे। जिन गाड़ियों के दस्तावेज पूरे नहीं थे या जो सुरक्षा नियमों (जैसे सीट बेल्ट) का उल्लंघन कर रही थीं, केवल उन्हीं का चालान काटा गया है। गैस एजेंसी के कर्मियों द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद हैं।"
एसडीएम ने दी सफाई
इस मामले के तूल पकड़ने के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल बढ़ गई। एसडीएम रत्ना प्रियदर्शनी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि ट्रैफिक पुलिस अपने नियत कार्य (वाहनों की चेकिंग) में जुटी थी। जांच के दौरान गैस एजेंसी की गाड़ी के दस्तावेज अधूरे पाए गए, जिस कारण जुर्माना लगाया गया। रही बात सिलेंडर की मांग करने की, तो उन्होंने इसे जांच का विषय बताया है। साथ ही, उन्होंने एजेंसी कर्मियों द्वारा सड़क जाम कर आम जनता को परेशानी में डालने पर भी नाराजगी जाहिर की।
फिलहाल, इस पूरे मामले ने स्थानीय प्रशासन के लिए एक चुनौती खड़ी कर दी है। जहाँ एक तरफ जनता को गैस के लिए जूझना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर विभागों के आपसी टकराव ने व्यवस्था को और अधिक जटिल बना दिया है।
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