बिहार में गृह विभाग के नाम पर 3 जिलों के SP के तबा

बिहार गृह विभाग के नाम पर ट्रांसफर का फर्जी खेल, तीन IPS अफसरों के तबादले की अधिसूचना वायरल होने के बाद एक्शन में पुलिस

न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क (अस्मित,पटना)बिहार में साइबर अपराधियों के दुस्साहस का एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रशासनिक महकमे को हिलाकर रख दिया है। शातिर साइबर ठगों ने इस बार किसी आम नागरिक को नहीं, बल्कि सीधे राज्य के गृह विभाग को निशाना बनाया है। अपराधियों ने बिहार के तीन जिलों—सीतामढ़ी, बेगूसराय और सारण के पुलिस अधीक्षकों (SP) के तबादले की एक हूबहू असली दिखने वाली फर्जी अधिसूचना तैयार की और उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। गृह विभाग के आधिकारिक प्रारूप और सील के साथ तैयार किए गए इस पत्र ने देखते ही देखते प्रशासनिक हलकों में भारी हलचल पैदा कर दी।

गृह विभाग की शिकायत पर एक्शन, पुलिस महकमे का ही जवान गिरफ्तार

जैसे ही गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को इस फर्जीवाड़े की भनक लगी, महकमे में हड़कंप मच गया। विभाग ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए तुरंत पटना के साइबर क्राइम थाने में केस दर्ज कराया। मामला सरकार और कानून व्यवस्था से जुड़ा होने के कारण साइबर पुलिस ने बिना वक्त गंवाए तकनीकी सर्विलांस के जरिए जांच शुरू की और त्वरित कार्रवाई करते हुए एक मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में सबसे सनसनीखेज मोड़ तब आया जब पता चला कि गिरफ्तार किया गया व्यक्ति कोई साधारण अपराधी नहीं, बल्कि खुद बिहार पुलिस विभाग का ही एक जवान है जो पहले से पुलिस में तैनात था।

बीमा चेक वितरण कार्यक्रम के दौरान हुआ सनसनीखेज खुलासा

इस पूरे फर्जी खेल का खुलासा भी बेहद नाटकीय अंदाज में हुआ। गृह विभाग में एक आधिकारिक कार्यक्रम चल रहा था, जहां दिवंगत पुलिसकर्मियों के परिजनों को बीमा चेक बांटे जा रहे थे। इसी दौरान वहां मौजूद शीर्ष अधिकारियों के मोबाइल पर सोशल मीडिया के जरिए यह तथाकथित ट्रांसफर ऑर्डर पहुंचा। गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने बताया कि देर रात तीन आईपीएस अधिकारियों के तबादले का यह पत्र बहुत तेजी से इंटरनेट पर फैलने लगा था। सूचना की पुष्टि होते ही पुलिस तुरंत एक्टिव हुई और मुख्य संदिग्ध को धर दबोचा।

बड़े साइबर रैकेट की आशंका, खंगाले जा रहे हैं डिजिटल सबूत

फिलहाल, पुलिस की स्पेशल टीमें गिरफ्तार आरोपी से लगातार बंद कमरे में पूछताछ कर रही हैं। जांच एजेंसियां यह जानने की कोशिश में जुटी हैं कि आखिर पुलिस महकमे के ही एक कर्मचारी ने गृह विभाग के नाम पर ऐसा फर्जी पत्र क्यों तैयार किया और इसके पीछे उसकी क्या मंशा थी। साइबर थाना प्रभारी और डीएसपी नीतीश चंद्र धारिया ने बताया कि मामले की गहराई से पड़ताल की जा रही है। आरोपी के मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट्स और तमाम डिजिटल गतिविधियों को खंगाला जा रहा है ताकि इस साजिश के पीछे छिपे पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके। पुलिस को शक है कि इस खेल में विभाग के कुछ और लोग या कोई बड़ा साइबर फ्रॉड गिरोह शामिल हो सकता है, जिसका जल्द ही पर्दाफाश किया जाएगा।

वायरल खबरों के दौर में सतर्कता और सरकारी पुष्टि जरूरी

यह घटना एक बड़ा सबक है कि आज के दौर में साइबर अपराधी सरकारी दस्तावेजों तक का गलत इस्तेमाल कर समाज और प्रशासन में भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में इस तरह की भ्रामक खबरों से बचने के लिए आम लोगों को भी किसी भी वायरल सरकारी आदेश पर तब तक भरोसा नहीं करना चाहिए, जब तक कि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से उसकी पुष्टि न हो जाए।