अब अयोध्या से सीतामढ़ी सिर्फ 5 घंटे में! तैयार हो रहा ₹6155 करोड़ का राम-जानकी फोरलेन, जानें कब से दौड़ेगी गाड़ियां
न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क: प्रभु श्री राम की नगरी अयोध्या आने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए एक बहुत बड़ी और सुखद खबर है। भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या से माता सीता के मायके (नेपाल के जनकपुर) को सीधे जोड़ने वाले भव्य 'राम-जानकी फोरलेन मार्ग' का निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। इस आधुनिक और हाई-स्पीड कॉरिडोर के बन जाने के बाद श्रद्धालु बेहद कम समय और सुरक्षित तरीके से दोनों देशों के प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन कर सकेंगे। यह प्रोजेक्ट भारत और नेपाल के सांस्कृतिक रिश्तों में एक नया अध्याय लिखेगा।
त्रेतायुग के 'बारात मार्ग' का हो रहा आधुनिक कायाकल्प
धार्मिक इतिहास और मान्यताओं के अनुसार, त्रेतायुग में भगवान श्री राम की बारात अयोध्या से जनकपुर जाने के लिए इसी मार्ग से गुजरी थी। रामायण सर्किट को विश्वस्तरीय बनाने के लिए अब इसी पौराणिक रास्ते को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है।
दूरी और समय दोनों में आएगी भारी कमी
वर्तमान समय में बुनियादी ढांचे और सड़कों की स्थिति के कारण श्रद्धालुओं को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है:
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फिलहाल अयोध्या से जनकपुर (दूरी लगभग 459 किमी) पहुंचने में यात्रियों को 14 से 15 घंटे का लंबा वक्त लग जाता है।
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नया फोरलेन बनने के बाद यह दूरी सिमटकर करीब 369 किलोमीटर रह जाएगी। सबसे बड़ी राहत यह होगी कि लोग महज 5 से 6 घंटे में अपनी यात्रा पूरी कर लेंगे।
6155 करोड़ का बजट और शानदार इंफ्रास्ट्रक्चर
केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर करीब 6155 करोड़ रुपये निवेश किए जा रहे हैं। लगभग 240 किलोमीटर लंबे इस मार्ग को साल 2027 तक हर हाल में पूरा करने का डेडलाइन तय किया गया है। सफर को बिना किसी बाधा (जाम-मुक्त) और रफ्तार देने के लिए इस रूट पर कई बड़े निर्माण किए जा रहे हैं:
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सीवान, तरवारा, बसंतपुर और मशरख जैसे व्यस्त इलाकों में शानदार बाईपास बनेंगे।
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रास्ते में 1 बड़ा पुल, 14 छोटे पुल, 15 अंडरपास, एक रेलवे ओवरब्रिज (ROB) और दो ग्रेड सेपरेटर का निर्माण किया जाएगा।
बिहार के इन जिलों को मिलेगा बंपर फायदा, चमकेगी इकोनॉमी
यह फोरलेन उत्तर प्रदेश की सीमा से निकलकर बिहार के सीवान, सारण, मशरख, शिवहर और माता सीता की प्राकट्य स्थली सीतामढ़ी होते हुए सीधे नेपाल बॉर्डर में प्रवेश करेगा।
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इससे बिहार के सुदूर ग्रामीण इलाकों की सीधे बड़े शहरों से कनेक्टिविटी हो जाएगी।
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इस रूट पर नए होटल, रेस्टोरेंट, ट्रांसपोर्ट हब और टूरिज्म से जुड़े बिजनेस खड़े होंगे, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए हजारों की संख्या में रोजगार के अवसर पैदा होंगे।