कूल-कोल्ड वाटर में जान लें अंतर और क्या होता है शरीर पर असर?
Editor Name: News11 Bharat
गर्मियां आते ही लोग ठंडा पानी पीना शुरू कर देते है और सर्दियों में ज्यादातर लोग गर्म पानी पीते है. पानी टेम्परेचर के हिसाब से ढलता है, इसलिए इसकी कोई एक तासीर नहीं होती है.
गर्मियों में लोग पीने से लेकर नहाने तक के लिए कई बार ठंडा पानी इस्तेमाल करते हैं, लेकिन क्या आपको कूल और कोल्ड वाटर में फर्क पता है और इसका सेहत पर क्या असर होता है.
कोल्ड या कूल वाटर में सबसे मुख्य अंतर होता है टेंपरेचर का. कूल वाटर आमतौर पर नॉर्मल रूम टेंपरेचर पर होता है. जो तकरीबन 15–25°C तक होता है.
जब हम कोल्ड वॉटर की बात करते हैं तो इसका मतलब है ज्यादा ठंडा. इसका टेम्परेचर तकरीबन 5–15°C के बीच होता है. इस पानी को त्वचा पर छूने से आपको हल्की सिरहन सी महसूस होती है.
कूल वॉटर यानी शीतल जल जो आपको हल्की ताजगी देता है और पीने में सहज लगता है. ये किसी भी मौसम में सेहत के लिए बिल्कुल सही माना जाता है.जबकि कोल्ड वॉटर तुरंत ठंडक पहुंचाता है, लेकिन नुकसान हो सकता है.
कोल्ड वाटर दांतों में झनझनाहट कर सकता है. इसके अलावा इससे डाइजेशन पर भी असर हो सकता है, जिससे कब्ज, एसिडिटी हो सकती है. वहीं ये कफ को भी बढ़ा सकता है, जिससे खांसी-खराश और टॉन्सिल हो सकते है.
डेली रूटीन में कम से कम 2.5 से लेकर 3 लीटर पानी पीना चाहिए. ज्यादा गर्म मौसम हो या जरूरत के मुताबिक मात्रा ज्यादा भी हो सकती है. पानी शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ त्वचा को चमकदार बनाए रखता है और बॉडी डिटॉक्स करता है.