न्यूज11 भारत
रांची/डेस्क: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का हर महीने के आखिरी रविवार को आकाशवाणी से प्रसारित होने वाला 'मन की बात' झारखंड के लिए खास हो गया. क्योंकि अभी हाल ही में झारखंड की राजधानी रांची के बिरसा स्टेडियम 100 मीटर फर्राटा दौड़ के बने राष्ट्रीय रिकॉर्ड का गवाह बना था. रांची में आयोजित 29वें नेशनल सीनियर फेडरेशन कप में गुरिन्दरवीर सिंह ने 10.09 सेकेंड का आश्चर्यजनक समय निकाल कर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था. इसी की प्रशंसा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने कार्यक्रम 'मन की बात' में की साथ ही रिकॉर्ड वीर गुरिन्दर वीर सिंह के साथ सीधा संवाद किया, जो इस प्रकार है-
प्रधानमंत्री : और गुरिन्दरवीर जी क्या है ?
गुरिन्दरवीर: नमस्ते सर, मेरा नाम गुरिन्दरवीर है और मैं Indian Navy में Patty Officer हूं और मैं India का सबसे तेज sprinter हूं अभी मैंने 100 मीटर में 10.09 का national record बनाया है. और मैं पहला Indian हूं जो 10.1 के barrier के नीचे भागा है, और मैं कोशिश कर रहा हूं कि मैं track और वर्दी में भी अपने देश की सेवा करूं. मेरे father और grandfather दोनों sports करते थे तो हमारे India का culture है जब भी कोई त्योहार होता है जैसे दिवाली, जैसे नया साल तो हम अपने घर की सफाई करते हैं. तो मैं अपने father की Trophies और Medals की सफाई करता था तो मेरे को वो बहुत अच्छा लगता था, मैं बहुत खुश होता था. तब जब मैं कोई trophy साफ करता था तो मैं पूछता था कि भई ये trophy कहां जीती, ये Medal कहां जीता, ये photo कब की है, तो फिर मेरे को वो अपनी कहानी सुनाते थे, कि भई मैं यहां खेलने गया, मैंने ये National Medal जीता, मैंने अपनी team को इसमें जिताया. तो फिर मैं भी उनको बोलता था कि भई मैं भी कोई sports करनी है. वो running करने जाते थे morning में, तो मैं उनको बोलने लगा भई मेरे को भी लेकर जाया करो अपने साथ. तो मेरे को लेकर जाने लगे तो उन्होंने जो अपनी game sports में सीखा था तो मेरे को सिखाने लगे. तो मेरा interest बनने लगा. मैंने Usain Bolt का world record टूटता हुआ देखा. तो एक story है ऐसे funny. मैं अभी TV देख रहा था तो मम्मी ने मेरी TV बंद कर दिया कि अभी बेटा पढ़ने का time हो गया, आप पढ़ो. तो मैं कहा भई ठीक है आप मेरे को TV नहीं देखने देते, एक दिन ऐसा आएगा आप मेरे को TV में ढूँढोगे कि देखो वो गुरिन्दर दौड़ रहा है. तो मेरे को भी खुशी होती जब मेरी माँ मेरे को TV पे दौड़ता हुआ देखती है.
प्रधानमंत्री : वाह वाह वाह. बड़ी शानदार बात है, भई आपकी तो.
गुरिन्दर वीर: हां जी. Middle Class Family है सर, फिर मेरे father वो भी volleyball खेलते थे. घर की problems की वजह से उन्होंने अपनी sports छोड़ दी. उनका जो सपना पूरा करने वाला रह गया. तो उन्होंने मेरे अंदर वो सपना देखा भई मेरा बेटा वो सपना पूरा करेगा तो मैं उनसे बातें करता था, फिर सुनता था मिल्खा सिंह इतनी मेहनत करते थे, मैं उनको बोलता था मैं भी एक दिन आपका सपना पूरा करूंगा. तो बोलते सपना पूरा ऐसे नहीं होता, उसके लिए बहुत hard work करना पड़ता है. मेहनत करनी पड़ती है. मिल्खा सिंह जी खून की उल्टियाँ करते थे, धूप में भागते थे. सारा-सारा दिन training करते थे तो वो चीजें मेरे को inspire करती थीं. मेरे father मेरे को inspire करते थे, कि मैं भागूंगा तो अपने देश के लिए, देश के लिए Medal लाऊं, जीतूं. और ये भी था कि भई जब मैंने event choose किया 100 मीटर तो सभी मेरे को बोलते थे कि भई 100 मत करो, 100 Indians का event नहीं है. Indians की body 100 मीटर के लिए बनी ही नहीं है. तो मैं और मेरे father हमेशा बोलते थे कि अभी गुरिन्दर हमने ये choose किया है, हम इससे पीछे नहीं हटेंगे. जो हमें बोलते हैं कि भई हम नहीं कर सकते हम उसको कर के दिखाएंगे. और तू करके दिखाएगा, मुझे तेरे पे भरोसा है. तो वो भरोसा जब मेरे को मेरे father ने मेरे पर किया तो मैं उस भरोसे को अपनी हिम्मत बनाके मैं चला और मैं आज हर Indian बोलता कि भई Indian Sprint कर.
प्रधानमंत्री : देखिए आप दोनों ने बहुत बड़ा कमाल किया है, और सिर्फ दो दिनों के भीतर आप दोनों ने तीन बार National Record तोड़ा है. 100 मीटर race में दौड़ना, जैसा गुरिन्दरवीर ने कहा कि लोग कहते हैं कि भारत के लोगों का तो बदन इस काम के लिए है ही नहीं. इतना मुश्किल होते हुए भी आपने काम किया तो ये दोनों से मैं जानना चाहूँगा, और ‘मन की बात’ के श्रोता भी सुनना चाहेंगे कि कौन सा जज्बा था, क्या जिद थी, क्या सोचा था, और कैसे कर रहे थे ? ये कितना मुश्किल होता है ?
गुरिन्दरवीर: जी सर, मैं गुरिन्दर, मैं जब starting में सर बहुत struggle था, बहुत बार doubt भी आया कि मैं सही कर रहा हूँ, मैं सही choose किया क्योंकि हर बार आप नहीं जीतते, कभी- कभी आप सीखते हो. जब मैं हारता था, जब मैं सही performance नहीं आती थी, कोई injury आ जाती थी तो मेरे घरवाले मेरे को support करते थे कि भई कोई नहीं एक दिन बुरा चला गया, एक साल बुरा चला गया तो इससे जिंदगी खराब नहीं होती. सपने देखना नहीं छोड़ते. तो मेरे coach ने भी मेरे को ये सिखाया कि अगर तू नहीं करेगा तो कोई और नहीं कर पाएगा. तो ऐसे जब हमारी community हमारे आसपास लोग हमें उत्साहित करते हैं तो हमारा कभी वो motivation नहीं टूटता.
यह भी पढ़ें: बारिश से टूटी गर्मी की कमर, मानसून की अच्छी रफ्तार से किसानों के चेहरों पर मुस्कान, अरब सागर के सर्कुलेशन ने पकड़ा जोर