न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
पटना - बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने वियतनाम के राष्ट्रपति टो लाम का गया जी एयरपोर्ट पर औपचारिक स्वागत किया। इस मौके पर राज्यपाल सैयद अताउल हसनैन भी उपस्थित रहे, जिससे कार्यक्रम की गरिमा और बढ़ गई। एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति के आगमन को लेकर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया और सभी कूटनीतिक प्रोटोकॉल का पालन किया गया। वियतनाम के राष्ट्रपति तीन दिवसीय भारत यात्रा पर हैं और इसी क्रम में उनका बिहार दौरा तय था। गया पहुंचने के बाद वे सीधे बोधगया के लिए रवाना हुए, जहां उनके स्वागत के लिए स्थानीय प्रशासन और बौद्ध समुदाय के लोग पहले से तैयार थे। इस यात्रा को भारत-वियतनाम संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हाईलाइट्स -
- वियतनाम के राष्ट्रपति टो लाम का गया एयरपोर्ट पर भव्य स्वागत
- मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और राज्यपाल ने किया रिसीव
- बोधगया पहुंचकर महाबोधि मंदिर में की पूजा-अर्चना
- वियतनाम बौद्ध मठ का भी किया दौरा
- गया और बोधगया में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू
- भारत-वियतनाम सांस्कृतिक संबंधों को मजबूती देने पर जोर
महाबोधि मंदिर में पूजा, आध्यात्मिक माहौल का अनुभव
बोधगया पहुंचने के बाद राष्ट्रपति टो लाम ने सबसे पहले महाबोधि मंदिर का रुख किया। यहां उन्होंने मंदिर के गर्भगृह में विधिवत पूजा-अर्चना की और भगवान बुद्ध के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित की। मंदिर परिसर में बौद्ध भिक्षुओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ उनका स्वागत किया और सम्मानस्वरूप अंगवस्त्र भेंट किया। पूरे परिसर में एक शांत और आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला, जिसने इस यात्रा को और विशेष बना दिया। इसके बाद राष्ट्रपति ने वियतनाम बौद्ध मठ का भी दौरा किया, जहां उन्होंने पूजा कर बौद्ध धर्म से जुड़े अपने सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने का संदेश दिया। यह दौरा दोनों देशों के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव को दर्शाता है।
कड़ी सुरक्षा व्यवस्था, दिल्ली के लिए रवाना होंगे राष्ट्रपति
राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए गया और बोधगया में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। एयरपोर्ट से लेकर महाबोधि मंदिर तक हर जगह पुलिस बल और सुरक्षा एजेंसियां तैनात रहीं। चप्पे-चप्पे पर निगरानी रखी गई और किसी भी तरह की चूक से बचने के लिए विशेष सतर्कता बरती गई। अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रपति अपने निर्धारित कार्यक्रम के तहत बोधगया से वापस गया एयरपोर्ट लौटेंगे और वहां से दिल्ली के लिए प्रस्थान करेंगे। यह यात्रा न केवल धार्मिक दृष्टि से अहम है, बल्कि इससे भारत और वियतनाम के बीच मित्रता और सहयोग के संबंधों को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
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