न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
पटना - बिहार की राजनीति में आज एक बेहद दिलचस्प और दुर्लभ दृश्य देखने को मिला। एक ओर नई सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार और शपथ ग्रहण समारोह चल रहा था, तो दूसरी ओर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पूरे आत्मीय भाव से मंच पर मौजूद नेताओं का अभिवादन कर रहे थे। राजनीति में ऐसे दृश्य बहुत कम देखने को मिलते हैं, जहां सत्ता परिवर्तन के बाद भी कटुता नहीं बल्कि सम्मान और सहजता दिखाई दे। आमतौर पर राजनीति में एक पक्ष की जीत और दूसरे की हार की तस्वीर उभरती है, लेकिन यहां मामला अलग था। नीतीश कुमार किसी पराजित नेता की तरह नहीं, बल्कि अपनी इच्छा से पद छोड़ने वाले अनुभवी और परिपक्व राजनेता के रूप में नजर आए।
जो लोग वर्षों तक उन्हें सत्तालोभी या “पलटू” कहकर आलोचना करते रहे, उनके लिए आज का यह दृश्य एक मजबूत जवाब जैसा था। सत्ता से अलग होने के बाद भी जिस विनम्रता, आत्मविश्वास और सहजता के साथ उन्होंने खुद को प्रस्तुत किया, उसने उनकी राजनीतिक परिपक्वता को और मजबूत किया।
सरकार सम्राट की, लेकिन दिशा नीतीश की
आज भले ही बिहार की कमान सम्राट चौधरी के हाथों में हो, लेकिन सरकार की कार्यशैली और विकास की दिशा में नीतीश कुमार की छाप साफ दिखाई देती है। एनडीए के कई नेताओं ने भी सार्वजनिक रूप से कहा कि बिहार आगे भी “नीतीश मॉडल” पर ही विकास करेगा। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि सरकार भले सम्राट चौधरी की हो, लेकिन उसका मार्गदर्शन अब भी कहीं न कहीं नीतीश कुमार के अनुभव और सोच से प्रभावित है।
शपथ ग्रहण समारोह के दौरान भी यह भाव साफ देखने को मिला। मुख्यमंत्री बनने के बाद सम्राट चौधरी ने जिस सम्मान और आत्मीयता के साथ नीतीश कुमार का अभिवादन किया, उसमें एक शिष्य द्वारा अपने राजनीतिक गुरु के प्रति सम्मान की झलक दिखाई दी।
गांधी मैदान में दिखी राजनीति की नई तस्वीर
गांधी मैदान में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह कई मायनों में खास रहा। मंच पर सत्ता परिवर्तन की नई तस्वीर थी, लेकिन नीतीश कुमार का अंदाज वही पुराना और परिचित रहा। पहले वे मुख्यमंत्री के रुप में मंच के केंद्र में हुआ करते थे और सम्राट चौधरी उनके साथ नजर आते थे। लेकिन आज तस्वीर बदल चुकी थी ,सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री थे और नीतीश कुमार पूर्व मुख्यमंत्री के रुप में मंच पर पहुंचे।
फिर भी, उनके व्यवहार में कोई बदलाव नहीं दिखा। मंच पर पहुंचते ही उन्होंने पूरे उत्साह और आत्मीयता के साथ सभी नेताओं से मुलाकात की। वे एक-एक नेता के पास गए, हाथ मिलाया और गर्मजोशी से उनका अभिवादन किया। यही सहजता और विनम्रता उनकी राजनीति की सबसे बड़ी पहचान रही है।
इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार की मुलाकात भी खास आकर्षण का केंद्र बनी। दोनों नेताओं ने मुस्कुराते हुए एक-दूसरे का अभिवादन किया और कुछ देर आत्मीय बातचीत भी की। मंच पर दिखी यह तस्वीर सिर्फ राजनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि लंबे राजनीतिक संबंधों और आपसी समझ की झलक भी थी। आज का यह पूरा आयोजन केवल सत्ता परिवर्तन का समारोह नहीं था, बल्कि बिहार की राजनीति में परिपक्वता, सम्मान और राजनीतिक संतुलन का एक अनोखा उदाहरण बन गया।
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