न्यूज11 भारत / पटना डेस्क: असम की एक चुनावी सभा में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा दिए गए एक बयान ने देश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। खरगे ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की तुलना 'जहरीले सांप' से करते हुए एक विवादित टिप्पणी की, जिस पर अब एनडीए (NDA) के घटक दलों ने मोर्चा खोल दिया है।
खरगे का विवादित बयान: "सांप सामने आए तो नमाज छोड़ उसे मार दो"
असम में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने धार्मिक संदर्भ का इस्तेमाल करते हुए सीधे तौर पर बीजेपी और आरएसएस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "कुरान शरीफ में लिखा है कि नमाज पढ़ते वक्त भी अगर जहरीला सांप सामने आ जाए, तो पहले नमाज छोड़ो और उस सांप को मार दो।" खरगे ने आगे कहा कि आज के दौर में आरएसएस और बीजेपी वही सांप हैं, और यदि उन्हें नहीं रोका गया (नहीं मारा गया), तो कोई बचेगा नहीं। उनके इस बयान को बीजेपी ने 'हेट स्पीच' और हिंसा भड़काने वाला करार दिया है।
रविशंकर प्रसाद का हमला: "कांग्रेस देश को दंगों में झोंकना चाहती है"
खरगे के इस बयान पर पटना साहिब के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष की भाषा न केवल सांप्रदायिक नफरत फैलाने वाली है, बल्कि यह देश के प्रधानमंत्री, मंत्रियों और करोड़ों स्वयंसेवकों का अपमान है। प्रसाद ने सवाल किया, "देश के प्रधानमंत्री खुद एक स्वयंसेवक हैं, कई मंत्री और सांसद संघ से जुड़े हैं। क्या खरगे जी मुसलमानों को इन सबको मारने के लिए उकसा रहे हैं?" बीजेपी ने इस मामले में चुनाव आयोग से तुरंत हस्तक्षेप और कार्रवाई की मांग की है।
नीरज कुमार (JDU) की नसीहत: "हार की बौखलाहट में न डराएं"
बीजेपी की सहयोगी पार्टी जेडीयू ने भी खरगे के बयान की निंदा की है। जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता और विधान पार्षद नीरज कुमार ने कहा कि जब कोई ईश्वर के ध्यान में होता है, तो वह आस-पास की चीजों पर ध्यान नहीं देता। उन्होंने इशारों में खरगे को समझाया कि लगातार मिल रही हार की बौखलाहट में किसी खास संप्रदाय को डराने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख और 'हेट स्पीच' का मामला
गौरतलब है कि हेट स्पीच के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट पहले ही बेहद सख्त है। शीर्ष अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दे रखा है कि नफरत फैलाने वाले बयानों पर बिना किसी औपचारिक शिकायत के भी तुरंत केस दर्ज किया जाए। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि ऐसे मामलों में देरी करना अदालत की अवमानना माना जाएगा। अब देखना यह है कि चुनाव आयोग और प्रशासन खरगे के इस बयान पर क्या कदम उठाता है।