न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
हाईलाइट्स -
- 8 जनवरी 2026 को कोलकाता में ED ने I PAC के कार्यालय पर मारा था छापा
- कोयला घोटाले को लेकर हुई थी छापेमारी
- बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने वहां पहुंचकर काटा था बवाल
- 2742 करोड रुपए के कोयला घोटाले की जांच कर रही थी ED
पटना - PK के नाम से मशहूर प्रशांत किशोर ने इंडियन पॉलीटिकल एक्शन कमेटी यानी I-PAC की स्थापना राजनीतिक पार्टियों को राजनीतिक परामर्श देने के लिए किया था। कई राजनीतिक दलों को राजनीतिक परामर्श दे चुकी इस कंपनी ने 2020 से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री की पार्टी TMC के लिए काम करना शुरू किया।
लेकिन इस कंपनी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे और 8 जनवरी 2026 की सुबह प्रवर्तन निदेशालय में इस कंपनी के दफ्तर पर छापा मारा। दरअसल ED 2742 करोड़ के कोयला घोट से जुड़ी मनी लांड्रिंग के मामले की जांच कर रही थी। इसी सिलसिले में ED ने कोलकाता स्थित I-PAC की दफ्तर और इसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के ठिकानों पर छापेमारी की थी। हालांकि इस पूरे प्रकरण से पहले ही प्रशांत किशोर ने अपने आप को I-PAC से अलग कर लिया था यानी I-PAC छोड़ दिया था।
ममता बनर्जी ने काटा था जमकर बवाल
8 जनवरी को जैसे ही ED की टीम ने I-PAC के दफ्तर के छापेमारी शुरू की इसके कुछ ही देर बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सूबे के डीजीपी के साथ वहां पहुंच गई। ममता बनर्जी इतने पर ही नहीं रुकी बल्कि परिवर्तन निदेशालय के जिन अधिकारियों ने कागजात को जप्त किया था। उनके हाथ से उन फाइलों को छीन कर ममता बनर्जी ने अपनी गाड़ी में रख लिया था। तब ममता बनर्जी ने यह आरोप लगाया था कि भारतीय जनता पार्टी के कहने पर ED की टीम उनकी पार्टी के रणनीति से जुडे कागजातों को ले जाने की कोशिश कर रहे थे।
2021 में ममता बनर्जी के चुनाव कैंपेन की कमान थी I-PAC के हाथ मे
सूत्र से मिली जानकारी के अनुसार I-PAC ने 2021 के चुनाव में TMC के लिए जो रणनीति तैयार की थी। उसके तहत तृणमूल कांग्रेस के दूध लेवल से लेकर नेताओं की सभाएं रैली यानी सब कुछ I-PAC ने ही तय किया था। सूत्र के अनुसार I-PAC मैं यह भी तय किया था कि 93 हज़ार बूथ चुनाव के दिन कौन कार्यकर्ता मौजूद रहेगा। इतना ही नहीं TMC के लिए काम कर रही I-PAC ने यह भी तय किया था कि किस बूथ पर कौन सा पुलिस अधिकारी मौजूद रहेगा।
इसके अलावा दूसरी पार्टी के पोलिंग एजेंट को किस तरह से हैंडल करना है इसकी भी योजना बनाकर तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को दे दी गई थी। यानी एक प्रकार से देखा जाए तो आईपैक ने सरकार और सरकारी अधिकारियों के दम पर यह योजना बनाई थी। बताया जाता है कि आईपैक और टीएमसी की इसी योजना की वजह से तीसरी बार ममता बनर्जी मुख्यमंत्री बनी थी।
I-PAC का कोलकाता स्थित दफ्तर किया गया बंद
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी का चुनावी चैंपियन संभालने वाली "आईपैक" का दफ्तर पहले चरण के चुनाव के ठीक 2 दिन पहले बंद कर दिया गया। बताया जा रहा है कि इसमें काम करने वाले 1300 कर्मचारियों को काम के लिए दफ्तर आने की बजाय वर्क फ्रॉम होम करने को कहा गया है। आपको बता दें कि ED ने इसी महीने की 13 तारीख को आईपैक के डायरेक्टर और ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के आईटी सेल के चीफ प्रतीक जैन के बेहद करीबी विनेश चंदेल को गिरफ्तार किया था।
इसके बाद 15 अप्रैल को प्रवर्तन निदेशालय ने प्रतीक जैन के परिवार के सदस्यों को भी सम्मान जारी किया था। सूत्र की माने तो प्रतीक जैन के करीबी और I-PAC में 33 फीसदी का हिस्सेदार विनेश चंदेल ने गिरफ्तारी के बाद कई खुलासे किए हैं।
पहले चरण के चुनाव के ठीक 2 दिन पहले हुए कार्रवाई से TMC को लगा झटका
अब जबकि ममता बनर्जी के लगातार दो चुनाव जीतने का खेल लोगों के सामने आ गया है। ऐसे में 2026 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भारी फजियत के साथ भारी घाटा उठाना पड़ रहा है। एक तरफ भाजपा जहां तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी के तूष्टिकरण - भ्रष्टाचार, घुसपैठियो को बचाने और महिलाओं के साथ अत्याचार के मामले को जनता के बीच ले जा रही है।
वही सेंट्रल फोर्स की तैनाती के बाद तृणमूल कांग्रेस के लिए आईपैक की 2021 वाली रणनीति 2026 में फेल होती दिख रही है। दूसरी तरफ चुनाव आयोग द्वारा 2026 के लिए किए गए इंतजाम और बूथ पर पारामिलिट्री फोर्स की तैनाती में वोटरों के मन से सामाजिक तत्वों का डर निकाल दिया है। यही वजह है कि 23 अप्रैल 2026 को पहले चरण के मतदान ने लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
I-PAC हुआ बंद तो क्या ममता भी हो जाएगी पैक !
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार ममता बनर्जी को करारा झटका लगने वाला है। राजनीतिक जानकार बताते हैं कि 2021 में भी अगर सेंट्रल फोर्स का डेप्लॉयमेंट सही ढंग से होता तो ममता बनर्जी के पर उस वक्त ही उखड़ चुके होते। राजनीतिक विश्लेषक यह भी बताते हैं कि आईपैक नामक कंपनी न सिर्फ तृणमूल कांग्रेस को चल रही थी। बल्कि लाखों की संख्या में उनके एजेंट पुलिस प्रशासन और सरकारी विभाग में भी घुसपैठ कर चुके थे। लेकिन इस बार चुनाव आयोग ने जिस प्रकार से चुनाव को लेकर कड़ा रुख अख्तियार किया है। उसकी वजह से ममता बनर्जी की राह में कई बड़े-बड़े चट्टान आ चुके हैं।
राजनीतिक विश्लेषक यह भी मानते हैं कि 2026 के पश्चिम बंगाल के चुनाव में अगर तृणमूल कांग्रेस की जीत होती है तो ममता बनर्जी फिर से 200 से ज्यादा सीट लाकर जीतेगी। जो फिलहाल संभव नहीं दिख रहा। राजनीतिक विश्लेषण का मानना है कि इस बार बीजेपी हो सकता है कि दो तिहाई बहुमत प्राप्त कर पश्चिम बंगाल में सरकार बनाए। अब ऐसा होगा कि नहीं यह तो 4 में को चुनाव परिणाम आने के बाद ही पता चलेगा। लेकिन इतना तय है कि इस बार ममता बनर्जी की राह इतनी आसान नहीं है।
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