न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
राजनैतिक विश्लेषण / पटना - बिहार में नीतीश कुमार के बाद बीजेपी का पहला मुख्यमंत्री कौन होगा' लगभग यह स्पष्ट हो चुका है। इसके संकेत चुनाव पूर्व प्रचार के दौरान अमित शाह ने पहले ही दे दिया था।
हाइलाइट्स :
- 13 अप्रैल को नीतीश कैबिनेट की आखिरी बैठक
- सीएम नीतीश कुमार ही रखेंगे बीजेपी के नए मुख्यमंत्री का नाम
- अमित शाह ने चुनाव पूर्व ही दे दिए थे संकेत
- समृद्धि यात्रा के दौरान नीतीश कुमार ने भी दिया था संदेश
बिहार में बीजेपी का पहला मुख्यमंत्री कौन होगा लगभग यह स्पष्ट हो चुका है। सूत्र की माने तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफा के बाद बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को ही सौंपी जाएगी बिहार की कमान। गौरतलब है कि सम्राट चौधरी उपमुख्यमंत्री होने के साथ-साथ बिहार के गृह मंत्रालय भी संभाल रहे हैं। सम्राट चौधरी की छवि कड़क और दमदार नेता के रूप में देखी जाती है।
गृह मंत्री अमित शाह ने चुनाव पूर्व ही दे दिया था संकेत
बिहार के विपक्षी दल भले ही यह कहते नहीं थक रहे हैं कि बीजेपी ने नीतीश कुमार को बिहार से हटाने के लिए प्रपंच रचा था। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव के दौरान '25 से 30 फिर से नीतीश' के नारे के साथ नीतीश कुमार के चेहरे पर ही एनडीए ने चुनाव जीता। लेकिन मौका मिलते ही बीजेपी ने साज़िश के तहत नीतीश कुमार को बिहार से हटा दिया।
हालांकि सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाने की औपचारिक घोषणा होनी अभी बाकी है। लेकिन हम बात करें बिहार विधानसभा चुनाव के पूर्व प्रचार की तो, इसके संकेत देश के गृह मंत्री अमित शाह ने पहले ही दे दिया था। आपको याद दिला दे की सम्राट चौधरी तारापुर विधानसभा क्षेत्र से जीत कर आए हैं। चुनाव प्रचार के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तारापुर में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए और सम्राट चौधरी का हाथ उठाकर यह कहा था कि आप इन्हें बड़े मार्जिन से जीता कर विधानसभा पहुंचाइये।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी सम्राट चौधरी को बड़ा आदमी बनाएंगे। चुनाव जीतने के बाद हालांकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही बने थे लेकिन, गृह मंत्रालय सम्राट चौधरी को दिलवाया गया था। यह दूसरा संकेत था कि बिहार में बहुत जल्द राजनीतिक फेरबदल होने जा रहा है।
बिहार के हिमंता विस्वा सरमा बनेंगे सम्राट चौधरी !
राजनीतिक गलियारे में यह चर्चा जोरों से है कि सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद बिहार में भी असम जैसा शासन देखने को मिल सकता है। असम के मुख्यमंत्री हिमंता विस्वा सरमा ने जिस प्रकार से घुसपैठियों के खिलाफ अभियान चलाया और असम के विकास के लिए काम किए हैं। उसी तर्ज पर बिहार में सम्राट चौधरी का शासन भी दिख सकता है। गौरतलब है कि फरवरी के महीने में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार के सीमांचल के इलाके में तीन दिवसीय दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने सीमांचल के इलाके में लगातार हो रहे घुसपैठ और बदल रहे डेमोग्राफी को लेकर चिंता जाहिर की थी।
अमित शाह ने 3 दिन के सीमांचल प्रवास के दौरान SSB, बीएसएफ, केंद्रीय जांच एजेंसी और बिहार पुलिस के आला अधिकारियों के साथ लगातार बैठक की थी। उन्होंने सीमांचल के क्षेत्र से ही ऐलान किया था कि बिहार से एक-एक घुसपैठियो को चुन चुन कर बाहर निकाला जाएगा। राजनीतिक जानकार बताते हैं कि अमित शाह के इस मुहिम के लिए सम्राट चौधरी ही सबसे उपयुक्त मुख्यमंत्री साबित हो सकते हैं। क्योंकि यह सिर्फ बिहार का नहीं बल्कि राष्ट्र की सुरक्षा से जुड़ा मामला है।
नीतीश कुमार के लव कुश वोट बैंक भी रहेंगे एकजुट
जानकारों का मानना है कि सम्राट चौधरी को बिहार का मुख्यमंत्री बनाकर भाजपा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लव कुश वोट को भी साधना चाहती है। बिहार में अगर जाति की बात करें तो कुर्मी से अधिक कुशवाहा जाति की संख्या अधिक है। इसलिए जातीय आधार पर भी सम्राट चौधरी बिल्कुल फिट बैठते हैं। यह लगभग तय है कि बिहार में फिलहाल कुछ दशक तक बैकवर्ड पॉलिटिक्स ही देखने को मिलने वाला है। सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद पिछड़ा-अति पिछड़ा दलित - महादलित और लव-कुश वोट बैंक भी बीजेपी के साथ जुड़ सकते हैं।
एक संकेत यह भी था, समझने वाले समझ गए
9 अप्रैल को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दिल्ली रवाना हुए थे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और कुछ वरिष्ठ नेता भी साथ में दिल्ली गए थे। नीतीश कुमार के दिल्ली रवाना होने के 1 घंटे बाद बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी दिल्ली के लिए रवाना हुए थे। 10 अप्रैल को राज्यसभा में शपथ ग्रहण करने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शाम में ही बिहार वापस लौट गए। लेकिन इसमें दिलचस्प बात यह थी कि नीतीश कुमार जिनके साथ दिल्ली गए थे उनके साथ नहीं लौटे बल्कि मुख्यमंत्री के साथ डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी दिल्ली से पटना पहुंचे।
यह भी एक संकेत ही था कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होने जा रहा है। हालांकि बीजेपी की ओर से या एनडीए की ओर से सम्राट चौधरी के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। लेकिन राजनीतिक गलियारे में अब लगभग यह तय माना जा रहा है कि बिहार के अगले मुख्यमंत्री और बीजेपी का पहले मुख्यमंत्री के तौर पर सम्राट चौधरी का चेहरा ही सामने आने वाला है। अब इंतजार है इसके आधिकारिक घोषणा की जो संभवत 14 अप्रैल या 15 अप्रैल को हो जाएगी। हालांकि सूत्र यह भी बताते हैं कि बीजेपी में कुछ भी संभव है और अंतिम क्षण में भी संभावित मुख्यमंत्री का चेहरा बदल सकती है।
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