न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
पूजा शर्मा ( संवाददाता ) / पटना - बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए उनकी समस्याओं के समाधान का भरोसा दिलाया। मंच से उन्होंने कहा कि एक सप्ताह के भीतर शिक्षकों को सचिवालय बुलाया जाएगा, जहां अधिकारियों के साथ बैठकर उनकी मांगों और समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। मंत्री ने कहा, “हम आपको सचिवालय बुलाएंगे, शिक्षा मंत्री की तरफ से चाय पिलाएंगे और जलपान भी करवाएंगे। जो निर्णय संभव होगा, उसे उसी दिन तत्काल प्रभाव से लिया जाएगा।” उनके इस बयान के बाद कार्यक्रम में मौजूद शिक्षकों के बीच उत्साह का माहौल देखने को मिला। लंबे समय से विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे शिक्षकों को मंत्री के इस आश्वासन से नई उम्मीद मिली है। शिक्षा मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार शिक्षकों की समस्याओं के प्रति गंभीर है और संवाद के जरिए समाधान निकालने की दिशा में काम कर रही है।
हाईलाइट्स -
- शिक्षा मंत्री ने शिक्षकों को एक सप्ताह के भीतर सचिवालय बुलाने की घोषणा की
- अधिकारियों के साथ बैठक कर समस्याओं पर तत्काल निर्णय लेने की बात कही
- शिक्षकों को समाज की “मोमबत्ती” बताते हुए विद्यालयों में शिक्षा पर ध्यान देने की अपील
शिक्षकों को बताया समाज की “मोमबत्ती”, शिक्षा पर ध्यान देने की अपील
अपने संबोधन के दौरान शिक्षा मंत्री ने शिक्षकों की भूमिका को समाज के लिए सबसे महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षक वह “मोमबत्ती” हैं, जो खुद जलकर दूसरों को रोशनी प्रदान करते हैं। मंत्री ने कहा कि समाज और राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका सबसे अहम होती है, इसलिए उन्हें अपने दायित्व को और मजबूती से निभाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सरकार की अपेक्षा है कि शिक्षक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में सक्रिय योगदान दें और बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए पूरी निष्ठा के साथ कार्य करें। मंत्री ने कहा कि गांवों और झोपड़ियों में बैठे प्रतिभाशाली बच्चों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी शिक्षकों के कंधों पर है। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे शिक्षा की अलख जलाकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का काम करें।
सड़कों पर संघर्ष नहीं, विद्यालयों में ज्ञान का दीप जलाएं
शिक्षा मंत्री ने अपने भाषण में शिक्षकों से आंदोलन और सड़क पर संघर्ष की राजनीति से दूर रहने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का स्थान चिलचिलाती धूप में सड़कों पर प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि विद्यालयों में बैठकर शिक्षा दीक्षा का दीप जलाना है। मंत्री ने कहा कि राज्य के लाखों बच्चों का भविष्य शिक्षकों पर निर्भर करता है और ऐसे में उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षकों के सम्मान और अधिकारों के प्रति प्रतिबद्ध है, लेकिन शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना भी सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। मंत्री के संबोधन को शिक्षकों के प्रति सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि सचिवालय में प्रस्तावित बैठक के बाद शिक्षकों की कई लंबित मांगों पर आगे ठोस निर्णय लिया जा सकता है।
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