न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
पूजा शर्मा / पटना - बिहार में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार और चेतन आनंद के मंत्री बनने की चर्चा के बीच पूर्व सांसद आनंद मोहन ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार को बचाने में उनकी भूमिका “जबरदस्त” रही है और यह बात किसी से छिपी नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आगे का फैसला पूरी तरह नेतृत्व पर निर्भर करता है।
हाईलाइट्स -
- सरकार बचाने में अपनी “जबरदस्त भूमिका” का दावा
- कैबिनेट विस्तार पर फैसला नेतृत्व पर छोड़ा
- ममता बनर्जी पर विपक्षी एकता न रखने का आरोप
- बंगाल की जनता के फैसले का सम्मान
पार्टी का फैसला नेतृत्व करेगा
आनंद मोहन ने सीधे तौर पर किसी पद या दावे की बात नहीं की, लेकिन अपने बयान से यह संकेत जरूर दिया कि राजनीतिक योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व जो भी निर्णय लेगा, वही अंतिम होगा। पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने ममता बनर्जी पर विपक्षी एकता बनाए रखने में विफल रहने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि ममता बनर्जी वामपंथी और कांग्रेस दलों को साथ लेकर नहीं चल पाईं, जिससे विपक्ष में एकजुटता की कमी दिखी।
जनता के फैसले का सम्मान
हालांकि आलोचना के बावजूद आनंद मोहन ने अंत में कहा कि जो भी परिणाम आया है, वह पश्चिम बंगाल की जनता का फैसला है और उसका सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने बंगाल की जनता का अभिनंदन करते हुए लोकतांत्रिक निर्णय का स्वागत किया।
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