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धनबाद/डेस्क: धनबाद जिले में पेयजल आपूर्ति की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है. बीते एक दशक में लगभग चार हजार करोड़ रुपये की लागत से शहरी और ग्रामीण जलापूर्ति की कई योजनाएं शुरू की गईं, लेकिन अधिकांश अब भी अधूरी पड़ी हैं. पाइपलाइन बिछाई गई, जलमीनारें खड़ी हुईं और ट्रीटमेंट प्लांट भी बनाए गए, बावजूद इसके बड़ी आबादी नियमित जलापूर्ति से वंचित है. कई मोहल्लों में नल तो लग चुके हैं, पर उनमें पानी नहीं पहुंचा.
धनबाद जिले में संचालित कई योजनाएं 70 से 85 प्रतिशत तक पूरी बताई जा रही हैं. तय समयसीमा भी गुजर चुकी है, फिर भी आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी. कहीं इंटेक वेल अधूरा है, कहीं पंप हाउस का निर्माण लंबित है, तो कहीं बिजली कनेक्शन नहीं मिल पाया. कुछ परियोजनाएं एनओसी और वाटर एक्सट्रैक्शन की अनुमति के अभाव में अटकी हैं. बायर एक्सट्रैक्शन के लिए दामोदर वैली कॉरपोरेशन (DVC) से अनुमति नहीं मिल पाई है.
क्या कहता है जिला प्रसाशन ?
जिला प्रशासन का कहना है कि तकनीकी अड़चनें, प्रक्रियागत विलंब और कार्य एजेंसियों की धीमी प्रगति के कारण योजनाएं समय पर पूरी नहीं हो सकीं. उपायुक्त ने संकेत दिया है कि गर्मी से पहले डीवीसी, नगर निगम और संबंधित एजेंसियों के साथ बैठक कर कम लागत और कम समय में पूरी होने वाली योजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी. सिंगल विलेज स्कीम का सर्वे भी जारी है.
गर्मी में जल संकट की आशंका
शहरी क्षेत्रों में स्थिति ज्यादा गंभीर है. गर्मी की आहट के साथ जल संकट की आशंका बढ़ गई है. स्थानीय लोग एक हजार रुपये प्रति टैंकर पानी खरीदने को मजबूर हैं. ग्रामीण इलाकों में भी कई गांवों में ट्रायल के बाद से आपूर्ति ठप है, जिससे लोगों को दूर-दराज से पानी लाना पड़ रहा है. विधायक चंद्रदेव महतो ने एजेंसियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए उन्हें ब्लैकलिस्ट करने की मांग की है. भारी निवेश के बावजूद राहत नहीं मिलने से लोगों में नाराजगी है. अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि गर्मी से पहले कितनी योजनाएं धरातल पर उतर पाती हैं.
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