न्यूज़11 भारत
पलामू/डेस्क: मेदीनी नगर निगम की आज बोर्ड बैठक में पार्षदों और निगम प्रशासन के बीच तीखा टकराव देखने को मिला, जिसके बाद गुस्साए पार्षदों ने बैठक का पूरी तरह से बहिष्कार कर दिया. पार्षदों का आरोप है कि नगर निगम में डस्टबीन वितरण और आवारा कुत्तों को पकड़ने की योजना के नाम पर व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताएं की गई हैं. मुख्य प्रवक्ता के रूप में वार्ड पार्षदों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि निगम अधिकारियों द्वारा बड़े-बड़े डस्टबीन का बिल पास कराकर बेहद छोटी बाल्टियां बांटी जा रही हैं, जिसकी भनक तक अधिकांश पार्षदों को नहीं लगने दी गई.
कागजों पर करीब 500 डस्टबीन का बिल स्वीकृत कराया गया है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि एक-एक वार्ड में बमुश्किल 100 डस्टबीन ही पहुंचाए गए हैं. जनप्रतिनिधियों ने इसे जनता के पैसे की खुली लूट करार देते हुए कहा कि शहर में हर दिन सिर्फ व्यक्तिगत स्वार्थ साधने का खेल चल रहा है और पिछले तीन वर्षों से लूट मचाने वाले अधिकारियों का ढर्रा नई बोर्ड के आने के बाद भी नहीं बदला है. पार्षदों ने स्पष्ट किया कि सभी 35 पार्षद शहर की व्यवस्था संभालने में शत-प्रतिशत सक्षम हैं, बशर्ते निगम की हर योजना और निर्णय जनप्रतिनिधियों के माध्यम से होकर गुज़रे.
इस पूरे गतिरोध पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए मेयर अरुणा शंकर ने भी निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि अधिकारियों का दावा है कि जो कुत्ते पकड़े गए थे, उन्हें बकायदा गिनकर रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है. इस विषय पर नगर आयुक्त ने भी अजीबोगरीब तर्क देते हुए कहा है कि हो सकता है वे कुत्ते किसी अन्य क्षेत्र से लाए गए हों, जिस पर अब कुछ नहीं किया जा सकता, हालांकि इस मामले में विभागीय कार्रवाई अभी भी जारी है. मेयर ने पार्षदों और आम जनता की शिकायतों का समर्थन करते हुए कहा कि धरातल पर किसी भी नागरिक को कभी कोई कुत्ता पकड़ने वाली गाड़ी या संबंधित कर्मचारी नजर नहीं आया. इस पर निगम प्रशासन ने सफाई दी है कि पिछले आठ महीनों से संबंधित एजेंसी का भुगतान नहीं किया गया है.
मेयर अरुणा शंकर ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि भुगतान रोकना एक अलग प्रशासनिक विषय है, लेकिन चूंकि यह पूरी प्रक्रिया अभी भी कागजों में चल रही है, इसलिए इसमें पूर्ण पारदर्शिता होनी अनिवार्य है. उन्होंने कड़ा निर्देश दिया कि भविष्य में टीम जिस भी वार्ड या चौक से आवारा कुत्तों को पकड़े, वहां का एक स्पष्ट वीडियो साक्ष्य अवश्य बनाए ताकि पूरी प्रक्रिया को आसानी से देखा और समझा जा सके.
वर्तमान स्थिति पर कड़ा असंतोष व्यक्त करते हुए मेयर ने मजाकिया लहजे में चारा घोटाले का जिक्र करते हुए तंज कसा कि जब धरातल पर कोई पुख्ता जमीनी सबूत ही नहीं है, तो सच्चाई कैसे सामने आएगी. हालांकि, जांच समिति के सदस्यों का कहना है कि शाहपुर स्थित संग्रहण केंद्र पर कागजी दस्तावेज मौजूद हैं, लेकिन जब से वर्तमान बोर्ड अस्तित्व में आया है, तब से धरातल पर ऐसा कोई काम नहीं देखा गया है. मेयर ने अंत में कड़े निर्देश देते हुए कहा कि अब निगम के इस कार्य में पारदर्शिता लाना अनिवार्य है, जिसके लिए हर चौक और इलाके की कार्रवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी, क्योंकि डिजिटल युग में निगम के हर कार्य का ऐप और पारदर्शी रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है और जनता को जवाब देना हमारी जिम्मेदारी है. वहीं, पृष्ठभूमि में एक महिला पार्षद ने भी आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि शहर में साफ-सफाई की व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है, चारों तरफ कचरे का अंबार लगा है और पेयजल की गंभीर समस्या बनी हुई है, लेकिन जनता द्वारा चुने जाने के बावजूद मुख्य जनहित के मुद्दों पर कोई ठोस काम नहीं हो रहा है.