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रांची/डेस्क: रांची यूनिवर्सिटी के तहत लॉ कॉलेज इंस्टिट्यूट ऑफ़ लीगल स्टडीज में एकेडमिक फैसिलिटी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर दाखिल याचिका पर आज (10 अप्रैल) झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. कोर्ट के आदेश के आलोक में उच्च शिक्षा के प्रधान सचिव, वित्त विभाग के प्रधान सचिव, जेपीएससी के सचिव और रांची यूनिवर्सिटी की वीसी, डीन और इंस्टिट्यूट ऑफ़ लीगल स्टडीज के डायरेक्टर हाजिर हुए. मामले में उच्च शिक्षा सचिव ने कोर्ट को बताया कि सरकार काम कर रही है, जो लगभग तीन माह में तैयार हो जाएगा. झारखंड के स्व वित्त पोषित संस्थाओं को एक सोसाइटी के तहत लाया जाएगा. स्वायत संस्थान में एक कमेटी बनेगी.
जिसमें संबंधित विश्वविद्यालय के बीसी और सरकार के प्रतिनिधि रहेंगे. संस्थान में कितने फैकल्टी की आवश्यकता है. इसका कमिटी स्वयं निर्धारण करेगी और उनकी सैलरी और नियुक्ति भी करेगी. जिसमे सरकार और जेपीएससी का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा. कोर्ट ने रांची विश्वविद्यालय से पूछा कि आईएलएस में कितने स्थाई असिस्टेंट प्रोफेसर की आवश्यकता है इस पर कोर्ट ने विश्वविद्यालय से जवाब मांगा है.
कोर्ट ने बार काउंसिल आफ इंडिया (बीसीआइ) को भी निर्देश दिया है कि आईएलएस का निरीक्षण कर देखें कि वहां कितने फैकल्टी की आवश्यकता है. कोर्ट ने कहा कि आईएलएस में प्रोफेसर की नियुक्ति अनुबंध के आधार पर ना की जाए. प्रोफेसर को यूजीसी पे स्केल के तहत ही भुगतान हो. वहीं इस मामले की अगली सुनवाई 6 मई को होगी.
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