अंग्रेजी जुल्म की दास्तां सुनाती कोचेडेगा के ग्रीनगोला की ढहती दीवारें, आज भी मौ...

अंग्रेजी जुल्म की दास्तां सुनाती कोचेडेगा के ग्रीनगोला की ढहती दीवारें, आज भी मौजूद है लोगों को बांधकर रखने वाला पिलर

अंग्रेजी जुल्म की दास्तां सुनाती कोचेडेगा के ग्रीनगोला की ढहती दीवारें आज भी मौजूद है लोगों को बांधकर रखने वाला पिलर

आशिष शास्त्री/न्यूज11  भारत

सिमडेगा/डेस्क:  सिमडेगा सदर प्रखंड का कोचेडेगा गांव कभी अंग्रेजों के कर वसूली की खास जगह थी. यहां अंग्रेजों के जमाने की एक ढहती हुई ग्रीनगोला प्राचीन इमारत अंग्रेजों के जुल्म की दास्तां सुनाती है. 

सदर प्रखंड के कोचेडेगा गांव में स्थित अंग्रेजों के जमाने का गोला घर आज भी इतिहास की मूक गवाही दे रहा है. यह भवन कभी ब्रिटिश शासन की जुल्म भरी प्रशासनिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण केंद्र था. लेकिन आज उपेक्षा का शिकार होकर धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील हो रहा है. गांव से गुजरने वाले लोग इसकी विशाल दीवारों और अनोखी बनावट को देखकर रुकते जरूर हैं. लेकिन इसके इतिहास से अधिकांश लोग अनजान हैं. भवन के बारे में कोई सूचना पट्ट या आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है. स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार अंग्रेजी शासनकाल में इस गोला घर का उपयोग बड़े पैमाने पर अनाज भंडारण के लिए किया जाता था. आसपास के गांवों से वसूला गया धान और अन्य खाद्यान्न यहां जमा किया जाता था. जरूरत पड़ने पर यही अनाज सेना और प्रशासन तक पहुंचाया जाता था. 

बताया जाता है कि अकाल और आपातकाल जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए भी इस भवन का उपयोग किया जाता था. व्यापारिक और राजस्व व्यवस्था को मजबूत रखने में इसकी अहम भूमिका थी. ग्रामीणों के बीच यह भी चर्चा है कि यह स्थान लगान वसूली केंद्र के रूप में भी इस्तेमाल होता था. बुजुर्गों का कहना है कि कर नहीं देने वाले किसानों को यहां लाकर दंडित किया जाता था. आज भी यहां एक पिलर मौजूद है. जिसमें बांध कर लोगों को दंडित किया जाता था. हालांकि इन दावों के लिखित ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं. लेकिन पीढ़ियों से चली आ रही लोककथाएं इस भवन को क्षेत्र के सामाजिक इतिहास से जोड़ती हैं.

वर्तमान में भवन की दीवारें जर्जर हो रही हैं. देखरेख के अभाव में इसकी स्थिति लगातार खराब होती जा रही है. इतिहास से जुड़ी यह धरोहर धीरे-धीरे लोगों की स्मृतियों से भी ओझल होती जा रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस भवन का संरक्षण नहीं किया गया तो इसके साथ क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण इतिहास भी समाप्त हो जाएगा. कोचेडेगा के मुखिया शिशिर टोप्पो ने जिला प्रशासन और पुरातत्व विभाग से गोला घर के इतिहास की जांच कर इसके संरक्षण की मांग की है.

सरकार अगर इस ढहती इमारत को संरक्षित करेगी. तो यह इमारत आने वाली कई पीढ़ियों को भी अंग्रेजी के गुलामी से रूबरू कराएगी.

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