पंकज कुमार/न्यूज11 भारत
घाघरा/डेस्क: घाघरा कड़ाके की ठंड, घना कोहरा, हाड़ कंपा देने वाली सुबह लेकिन घाघरा के निजी स्कूलों पर इसका कोई असर नहीं दिख रहा. सरकारी स्कूलों में समय परिवर्तन कर बच्चों को राहत दी जा रही है, पर निजी स्कूलों ने मानो ठान लिया है कि वे नियम और मानवीय संवेदनाओं से ऊपर हैं.
समय परिवर्तन से मुंह मोड़ते निजी स्कूल
नतीजा यह है कि नन्हे–नन्हे बच्चे अंधेरे और कोहरे को चीरते हुए सुबह-सुबह स्कूल जाने को मजबूर हैं. कई बच्चे ठंड से कांपते हुए स्कूल पहुंच रहे हैं, तो कई की तबीयत बिगड़ने की शिकायतें भी अभिभावक कर रहे हैं. अभिभावकों ने सवाल उठाया है कि क्या निजी स्कूलों के लिए बच्चों की जान से ज्यादा फीस और डिसिप्लिन अहम हो गया है?
अभिभावकों का कहना है ठंड को देखते हुए जब सरकारी स्कूल बच्चे को ठंड से बचाने के लिए समय बदल सकते हैं, तो निजी स्कूलों की ये जिद किस बात की है
निजी स्कूलों में पढ़ाई का दबाव इतना बढ़ा दिया गया है कि बच्चों का बचपन किताबों और कॉपियों में कैद होकर रह गया है. ऊपर से ठिठुराती ठंड में सुबह की मजबूरी ने स्थिति और भयावह बना दी है. बच्चे इंसान हैं, मशीन नहीं कि बटन दबाया और ठंड महसूस ही नहीं होगी.
अभिभावकों ने जिला प्रशासन, बीईओ और शिक्षा विभाग से मांग की है कि घाघरा तथा आसपास के सभी निजी स्कूलों पर सख्ती की जाए. मौसम की स्थिति को देखते हुए स्कूल समय में तत्काल बदलाव का आदेश जारी किया जाए और जो स्कूल आदेश का पालन न करें, उन पर कार्रवाई हो.
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