बालू घाट संचालन के विरोध में सपादा ग्राम सभा, सीमांकन के बिना खनन नहीं होने देने की चेतावनी

बालू घाट संचालन के विरोध में सपादा ग्राम सभा, सीमांकन के बिना खनन नहीं होने देने की चेतावनी

बालू घाट संचालन के विरोध में सपादा ग्राम सभा सीमांकन के बिना खनन नहीं होने देने की चेतावनी

मनोज सिंह/न्यूज11 भारत
सरायकेला/डेस्क:
सरायकेला खरसावां कुकड़ू प्रखंड क्षेत्र के मौजा सपादा में प्रस्तावित बालू घाट संचालन को लेकर आयोजित ग्राम सभा में ग्रामीणों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया.  ग्राम प्रधान बासुदेव सिंह मुंडा की अध्यक्षता एवं कुकड़ू अंचल अधिकारी की उपस्थिति में हुई बैठक में ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि जब तक बालू घाट क्षेत्र का स्पष्ट सीमांकन नहीं किया जाता, तब तक किसी भी प्रकार का बालू उठाव स्वीकार नहीं किया जाएगा.   

बैठक में जिला खनन विभाग द्वारा ई-नीलामी के माध्यम से चयनित एजेंसी गो-क्वेस्ट सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड, कोलकाता के माध्यम से बालू घाट संचालन के प्रस्ताव पर चर्चा हुई.  इस दौरान ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि स्थानीय लोगों की चिंताओं और ग्राम सभा के अधिकारों को पर्याप्त महत्व दिए बिना घाट संचालन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है.   

ग्राम सभा में पारित प्रमुख प्रस्ताव:

  • सीमांकन अनिवार्य: बिना भौतिक सत्यापन और ग्राम सभा की सहमति से चिन्हित सीमांकन के घाट से बालू उठाव नहीं होने दिया जाएगा.   
  • मशीनों पर रोक: ग्रामीणों ने मशीनों से बालू उठाव का विरोध करते हुए कहा कि इससे स्थानीय लोगों का रोजगार प्रभावित होगा.  केवल हाथ से बालू निकालने की अनुमति दी जाए.   
  • स्थानीय को प्राथमिकता: यदि बालू घाट का संचालन होता है तो उसमें स्थानीय मजदूरों और ग्रामीणों को प्राथमिकता दी जाए तथा बाहरी लोगों की भर्ती पर रोक लगे.   
  • पर्यावरण सुरक्षा: नदी के किनारे 50 मीटर तक बालू उठाव प्रतिबंधित हो.  घाट से ट्रैक्टर की आवाजाही के लिए अलग रास्ता बनाया जाए ताकि खेतों को नुकसान न हो.   
  • राजस्व में हिस्सेदारी: बालू घाट से प्राप्त राजस्व का 25% ग्राम विकास समिति को दिया जाए, जिसका उपयोग गांव के विकास कार्यों में होगा.   

ग्राम प्रधान ने कहा कि PESA ACT1996 और झारखंड पंचायत राज अधिनियम के तहत ग्राम सभा की सहमति के बिना अनुसूचित क्षेत्रों में खनन नहीं हो सकता.  अंचल अधिकारी ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि उनकी मांगों को जिला खनन पदाधिकारी और उपायुक्त तक पहुंचाया जाएगा.  बिना सीमांकन और ग्राम सभा की लिखित सहमति के खनन शुरू नहीं होगा.   

बैठक में पंचायत समिति सदस्य, वार्ड सदस्य, माझी बाबा, महिला समिति की सदस्य और करीब 200 ग्रामीण उपस्थित थे.  ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी कर जबरन खनन शुरू किया गया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा.   

गो-क्वेस्ट सॉल्यूशन के प्रतिनिधि ने बताया कि कंपनी नियमों के तहत ही कार्य करेगी और स्थानीय लोगों को रोजगार में प्राथमिकता दी जाएगी.  कंपनी जल्द ही सीमांकन के लिए सर्वे टीम भेजेगी. इस मौके पर मुख्य सुधीर सिंह,ग्राम प्रधान पीताम्बर सिंघमंकी, पूर्व प्रमुख शंकर सिंह मुंडा,गौरांग प्रामाणिक के साथ सैकडो संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे.

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