संतोष श्रीवास्तव/न्यूज़ 11भारत
पलामू/डेस्क: इस्लामी शिक्षा और समाज सुधार के क्षेत्र में अपनी अमिट पहचान रखने वाले मरकजी दारुल उलूम के हेड मुअल्लिम कारी जसीमुद्दीन शमीमी का शुक्रवार की शाम लगभग 7:45 बजे रांची स्थित रिम्स अस्पताल में निधन हो गया. वे पिछले 15 दिनों से बीमार थे और वहां उनका इलाज चल रहा था. उनके इंतकाल की खबर फैलते ही पलामू और गढ़वा क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है.
तीन दशकों का शैक्षिक सफर
मूल रूप से गढ़वा के टेढ़ी हरिया गांव के रहने वाले कारी शमीमी बीते 30 वर्षों से शाहपुर के तैबा नगर में रहकर समाज की सेवा कर रहे थे. उन्होंने मरकजी मदरसा में तीन दशकों तक बच्चों को उर्दू और दीन-ए-इस्लाम की शिक्षा दी. उन्हें न केवल एक बेहतरीन शिक्षक, बल्कि एक नेक दिल समाज सुधारक के रूप में भी जाना जाता था.
समाज के लिए अपूरणीय क्षति
गोसिया मदरसा के मुफ्ती मुजीबुल्लाह ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि कारी शमीमी का जीवन कौम की एकता और भाईचारे के लिए समर्पित था. वे विशेष रूप से गरीब और अनाथ बच्चों की मुफ्त शिक्षा के लिए हमेशा आगे रहते थे. उनका जाना पूरे समाज और शिक्षा जगत के लिए एक ऐसा शून्य पैदा कर गया है जिसे भरना नामुमकिन है.
हाल ही में लौटे थे मुकद्दस सफर से
बताया गया कि कारी जसीमुद्दीन शमीमी बीते 25 नवंबर 2025 को मक्का और मदीना की पवित्र यात्रा पर गए थे. 15 दिसंबर 2025 को वहां से वापसी के बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी, जिसके बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए रिम्स में भर्ती कराया गया था.
आज दी जाएगी अंतिम विदाई:
कारी शमीमी अपने पीछे चार पुत्रों और तीन पुत्रियों समेत एक भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं. उनके सम्मान में मदरसा गौसिया में कुरानखानी और मिलाद शरीफ का आयोजन कर उनकी मगफिरत के लिए दुआ की गई. शनिवार को असर की नमाज के बाद शाहपुर मजार के पास स्थित कब्रिस्तान में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा.
यह भी पढ़ें: पुलिस अधीक्षक ग्रामीण ने मासिक बैठक में दी जानकारी, अपराध में 10 फीसदी की आयी कमी